
Mother’s Day Special: आगामी 10 मई को मदर्स डे मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ मां के प्यार और त्याग को सेलिब्रेट करने का मौका नहीं है, बल्कि परिवार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उनकी भूमिका को भी दिखाता है। बदलते समय में अब कई मदर्स अपने बच्चों के साथ मिलकर घर खरीदने जैसे बड़े फैसलों में भी भागीदारी निभा रही हैं।
जॉइंट होम लोन बन रहा नया ट्रेंड
आज के समय में घर खरीदना सिर्फ एक प्रॉपर्टी लेना नहीं, बल्कि लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा और एसेट बनाने का जरिया बन चुका है। ऐसे में मां और बच्चे का साथ मिलकर घर खरीदना एक समझदारी भरा कदम माना जा रहा है। कई परिवार अब जॉइंट होम लोन का ऑप्शन चुन रहे हैं, जहां मां को-एप्लिकेंट बनकर बच्चे की मदद कर रही हैं।
BASIC Home Loan के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि जॉइंट होम लोन लेने से पहले जिम्मेदारियों को समझना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक जॉइंट होम लोन में दोनों उधारकर्ताओं की कानूनी जिम्मेदारी बराबर होती है। भले ही EMI का भुगतान आपसी समझ से तय हो, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों जिम्मेदार रहते हैं।
सिर्फ को-एप्लिकेंट बनने से नहीं मिलता मालिकाना हक
एक अहम बात यह भी है कि सिर्फ को-एप्लिकेंट बनने से प्रॉपर्टी में मालिकाना हक नहीं मिलता। अगर मां प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा चाहती हैं या टैक्स बेनिफिट लेना चाहती हैं, तो उन्हें को-ओनर के तौर पर भी शामिल होना जरूरी है।
अगर होम लोन सही तरीके से स्ट्रक्चर किया जाए, तो दोनों को टैक्स बेनिफिट भी मिल सकता है। Section 80C के तहत प्रिंसिपल रीपेमेंट पर 1.5 लाख रुपये तक और Section 24(b) के तहत ब्याज पर 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट का फायदा लिया जा सकता है।
लोन टेन्योर की प्लानिंग भी जरूरी
होम लोन लेते समय बैंक और फाइनेंशियल संस्थाएं उम्र को भी ध्यान में रखती हैं। ऐसे में कई बार माता-पिता को को-एप्लिकेंट बनाने से लोन की योजना बेहतर तरीके से तैयार हो पाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि EMI और रीपेमेंट का प्लान लंबे समय को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए।
अतुल मोंगा के अनुसार, शुरुआत में ही यह तय कर लेना चाहिए कि EMI में कौन कितना योगदान देगा, प्रॉपर्टी की ओनरशिप कैसी होगी और भविष्य में बदलावों को कैसे संभाला जाएगा। इससे आगे चलकर किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
मां-बच्चे का रिश्ता अब आर्थिक साझेदारी भी
मदर्स डे के मौके पर यह साफ दिख रहा है कि मां अब सिर्फ भावनात्मक सहारा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में आर्थिक रूप से भी अहम भूमिका निभा रही हैं। सही जानकारी और स्पष्ट योजना के साथ मां और बच्चे मिलकर घर खरीदने का सपना आसानी से पूरा कर सकते हैं।





