Hormuz blockade: इंडक्शन चूल्हों की ओर बढ़ता रुख भारत की बिजली मांग में 13-27 गीगावाट तक कर सकता है इजाफा

AhmadJunaidBlogApril 14, 2026361 Views


पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण रसोई गैस (LPG) की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। इस संकट का सीधा असर अब भारतीय रसोई के बजट और देश की बिजली व्यवस्था पर दिखने लगा है। चूंकि भारत अपनी 90 प्रतिशत एलपीजी का आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते करता है और युद्ध के कारण यह मार्ग बुरी तरह प्रभावित है, इसलिए लोग अब तेजी से इंडक्शन कुकिंग की ओर रुख कर रहे हैं।

बिजली की मांग में भारी उछाल

ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने चेतावनी दी है कि इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल से डिस्ट्रीब्यूशन लेवल पर बिजली की मांग 13 गीगावाट से 27 गीगावाट तक बढ़ सकती है।

हालांकि, पाणिग्रही का मानना है कि अभी तक ग्रिड पर इसका प्रभाव सीमित है, लेकिन भविष्य में यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है। उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों की जलवायु और खान-पान की आदतें इस मांग को कम या ज्यादा कर सकती हैं। जहां लोग ज्यादा इंडक्शन अपनाएंगे, वहां लोड 27 गीगावाट तक जा सकता है।

सरकार की तैयारी और नए कदम

इस बढ़ती मांग से निपटने के लिए बिजली मंत्रालय ने मोर्चा संभाल लिया है। मंत्रालय ने 10 गीगावाट क्षमता वाले कोयला आधारित पावर प्लांट्स के मेंटेनेंस (रखरखाव) को तीन महीने के लिए टाल दिया है, ताकि बिजली उत्पादन में कोई कमी न आए। संयुक्त सचिव पीयूष सिंह ने बताया कि इस साल देश में बिजली की अधिकतम मांग (Peak Demand) 271 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

सरकार अप्रैल से जून के बीच 22 गीगावाट की नई बिजली क्षमता जोड़ने की तैयारी में है, जिसमें सोलर, विंड और थर्मल पावर शामिल हैं। साथ ही, गैस आधारित प्लांट को अब खुद एलएनजी आयात करने की छूट दे दी गई है।

ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। भारत अब रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी तेल और गैस खरीद रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।

सुजाता शर्मा ने यह भी पुष्टि की कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserves) को बढ़ाने पर विचार कर रही है। रिफाइनरियों के लिए जो भी सौदा तकनीकी और व्यावसायिक रूप से सही होगा, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।

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