
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मल्टीबैगर अवसरों में से एक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले साल में भारत का कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम और क्विक कॉमर्स सेक्टर अगली बड़ी दौलत बनाने वाली थीम साबित हो सकते हैं।
Groww के 10वें फाउंडेशन इवेंट ‘India Investor Festival’ में बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि मल्टीबैगर वहीं बनते हैं जहां अर्थव्यवस्था और उद्योग दोनों तेजी से बढ़ रहे हों। उन्होंने मोतीलाल ओसवाल की एक इंटरनल स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि NSE 500 की करीब 20 फीसदी कंपनियों ने एक दशक तक 25 फीसदी से ज्यादा सालाना रिटर्न दिया, यानी वे 10-बैगर बनीं। तुलना में S&P 500 में यह आंकड़ा सिर्फ 7 फीसदी रहा।
Sensex 3,00,000 पहुंचेगा – रामदेव अग्रवाल
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अगले छह-सात साल में दोगुनी हो सकती है। उन्होंने Sensex के 2030 तक 1.5 लाख और 2036 तक 3 लाख अंक छूने की संभावना जताई।
उन्होंने कहा कि 12 साल में Sensex का 3 लाख तक पहुंचना छह साल में 1.5 लाख पहुंचने से ज्यादा तय है। यही कंपाउंडिंग की ताकत है। अग्रवाल के मुताबिक निवेश में सबसे अहम चीज विजन, साहस और धैर्य है। उन्होंने कहा कि बड़े मल्टीबैगर शेयरों में लंबे समय तक टिके रहने के लिए मजबूत कन्विक्शन चाहिए, क्योंकि असली वेल्थ क्रिएशन अक्सर आखिरी कुछ साल में होती है।
भारत Ferrari है- रामदेव अग्रवाल
अग्रवाल ने भारत की तुलना Ferrari से करते हुए कहा कि कुछ एशियाई बाजार फिलहाल AI थीम से फायदा उठा रहे हैं, लेकिन भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ कहानी सबसे मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि 1980 में शुरू हुए भारत के सेंसेक्स और दक्षिण कोरिया के KOSPI की तुलना करें तो आज KOSPI करीब 5,000 अंक पर है, जबकि Sensex 80,000 के पार पहुंच चुका है। उनके मुताबिक पिछले दो दशकों में भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन डॉलर टर्म्स में करीब 14 फीसदी की दर से बढ़ा, जबकि अमेरिकी बाजार में यह करीब 7 फीसदी रहा।
क्विक कॉमर्स में दिख रहा ‘भारती मोमेंट’
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर आज उसी दौर में है, जहां कभी टेलीकॉम इंडस्ट्री थी। उन्होंने इसे भारती मोमेंट बताते हुए कहा कि अभी कंपनियां भारी कैश बर्न में हैं, लेकिन नेटवर्क इफेक्ट्स भविष्य में बेहद बड़े बिजनेस बना सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में डीमैट अकाउंट की संख्या 22 करोड़ के पार पहुंच चुकी है और 2031-32 तक यह 50-60 करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे ब्रोकिंग, एक्सचेंज, एसेट मैनेजमेंट और वेल्थ प्लेटफॉर्म कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा।
किन कंपनियों से रहते हैं दूर?
अग्रवाल ने कहा कि वे 20 फीसदी से कम रिटर्न ऑन इक्विटी वाली कंपनियों को गंभीरता से नहीं देखते। उन्होंने मैनेजमेंट क्वालिटी को सबसे बड़ा फिल्टर बताया और कहा कि कमजोर गवर्नेंस वाले प्रोमोटर्स निवेशकों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।






