Form 16 मिलते ही न करें ITR फाइल! पहले चेक करें ये 6 जरूरी चीजें, नहीं कीं तो हो सकता है नुकसान

AhmadJunaidBlogJune 12, 2026360 Views


Form 16 मिलते ही अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारी राहत की सांस लेते हैं। इसमें वेतन, टैक्स कटौती और नियोक्ता द्वारा तैयार किया गया पूरा टैक्स कैलकुलेशन होता है। ऐसे में कई लोग इसे सीधे अपलोड कर आयकर रिटर्न (ITR) फाइल कर देते हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लापरवाही महंगी पड़ सकती है। फॉर्म 16 में छोटी-सी गलती भी टैक्स नोटिस, गलत टैक्स क्रेडिट या अतिरिक्त टैक्स पेमेंट की वजह बन सकती है। इसलिए AY2026-27 के लिए ITR दाखिल करने से पहले फॉर्म 16 को अच्छे से चेक करना जरूरी है।

फॉर्म 16 के दोनों हिस्सों को समझें

इंडिया टुडे को बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी के जॉइंट सेक्रेटरी मृणाल मेहता के अनुसार, फॉर्म 16 को केवल एक दस्तावेज के रूप में नहीं देखना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि पार्ट-A TRACES पोर्टल से जारी TDS प्रमाणपत्र होता है, जबकि पार्ट-B में नियोक्ता वेतन और टैक्स गणना का पूरा डिटेल्स देता है।

कर्मचारियों को पार्ट-A में अपना PAN, नियोक्ता का TAN और TDS डिटेल चेक करना चाहिए। वहीं पार्ट-B में वेतन, छूट, कटौतियों और टैक्सेबल इनकम की गणना को ध्यान से देखना चाहिए।

PAN, असेसमेंट ईयर और सैलरी डिटेल्स को चेक करें

इंडिया टुडे को सुदित के. पारेख एंड कंपनी LLP की डायरेक्ट टैक्स पार्टनर अनीता बसरूर ने बताया कि सबसे पहले PAN, असेसमेंट ईयर, ग्रौस सैलरी और TDS आंकड़ों को चेक करें।

यदि PAN गलत दर्ज हो जाए तो नियोक्ता द्वारा जमा किया गया टैक्स आपके खाते में क्रेडिट नहीं हो सकता। साथ ही फॉर्म 16 में दर्ज वेतन का मिलान सैलरी स्लिप और एनुअल सैलरी रिकॉर्ड से भी करना चाहिए।

सिर्फ TDS कटा नहीं, जमा भी हुआ या नहीं?

कई कर्मचारी केवल यह देखते हैं कि सैलरी से TDS काटा गया है या नहीं। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी है कि नियोक्ता ने वह टैक्स सरकार के पास जमा भी कराया है।

इसके लिए फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS का मिलान करना चाहिए। यदि TDS जमा नहीं हुआ होगा तो उसका क्रेडिट 26AS में दिखाई नहीं देगा।

कटौतियों और छूटों का करें मिलान

HRA, LTA, NPS योगदान और Chapter VI-A के तहत मिलने वाली कटौतियों की जांच भी जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, कई बार निवेश प्रमाण जमा करने के बावजूद कटौतियां फॉर्म 16 में शामिल नहीं होतीं, जिससे टैक्सेबल इनकम बढ़ जाती है।

सही टैक्स रिजीम चुनना न भूलें

नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) अब डिफॉल्ट है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं होती। एक्सपर्ट मृणाल मेहता के मुताबिक, यदि नियोक्ता ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत TDS काटा है, लेकिन आप 80C, 80D या HRA जैसी कटौतियां लेना चाहते हैं, तो ITR भरते समय पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन सकते हैं।

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साथ ही यह भी जांचना चाहिए कि सही स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू हुआ है या नहीं। नई व्यवस्था में यह 75,000 रुपये और पुरानी व्यवस्था में 50,000 रुपये है।

फॉर्म 16 में नहीं दिखने वाली इनकम को न भूलें

एक्सपर्ट्स के अनुसार, फॉर्म 16 केवल सैलरी और TDS का दस्तावेज है, पूरी इनकम का नहीं। सेविंग अकाउंट का ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन, फ्रीलांस आय या साइड बिजनेस से होने वाली कमाई इसमें शामिल नहीं होती। ऐसी इनकम को ITR में अलग से घोषित करना जरूरी है।

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