Chola Copper Plates: 1000 साल पुरानी चोल ताम्र पत्र कैसे पहुंचीं नीदरलैंड जिसे अब पीएम मोदी ला रहे हैं वापस?

AhmadJunaidBlogMay 18, 2026358 Views


नीदरलैंड्स सरकार ने पीएम मोदी की यात्रा पर उन्हें भारतीय विरासत की कई ऐतिहासिक धरोहर लौटाने का फैसला किया है। इन विरासत में भारतीय शासकों की कई ऐतिहासिक कहानियां सामाहित है।  

भारत लौट रही 11वीं सदी की चोल ताम्र पत्र सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि ये उस दौर का ऑफिशियल डेटा रिकॉर्ड हैं, जब भारत समुद्री व्यापार और कूटनीति में दुनिया की बड़ी ताकत था।

पीएम की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत को लौटाई गईं ये ‘लीडेन प्लेट्स’ चोल साम्राज्य के प्रशासन, टैक्स सिस्टम, समुद्री व्यापार और दक्षिण-पूर्व एशिया से रिश्तों की ऐसी तस्वीर पेश करती हैं, जो आज के ‘इंडिया ऐज ए ग्लोबल ट्रेड पावर’ नैरेटिव से भी जुड़ती है।

क्यों खास हैं ये प्लेट्स?

इन 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों पर तमिल और संस्कृत में लिखे रिकॉर्ड हैं। इनमें राजा राजेंद्र चोल प्रथम और राजा राजराजा चोल प्रथम के शासन की जानकारी दर्ज है।

इतिहासकारों के मुताबिक, ये रिकॉर्ड बताते हैं कि करीब 1000 साल पहले भारत सिर्फ एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था नहीं था, बल्कि समुद्री व्यापार, बंदरगाह प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी बेहद संगठित शक्ति था।

भारत का ‘ब्लू इकॉनमी मॉडल’ 1000 साल पहले

इन ताम्र पत्र में नागापट्टिनम बंदरगाह, सिंचाई व्यवस्था, टैक्स कलेक्शन और बौद्ध मठ ‘चूड़ामणि विहार’ को दिए गए ग्रांट के बारे में जानकारी मिलती है। यानी उस समय:-

  • भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया से मजबूत समुद्री व्यापार था
  • धार्मिक और सांस्कृतिक कूटनीति भी चल रही थी
  • बंदरगाह आधारित अर्थव्यवस्था विकसित थी
  • प्रशासनिक रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखे जाते थे

इतिहासकर इसे भारत के शुरुआती ब्लू इकॉनमी मॉडल का उदाहरण मानते हैं। ब्लू इकोनॉमी मॉडल (Blue Economy Modle) एक ऐसा टिकाऊ आर्थिक मॉडल है, जिसके तहत समुद्र, महासागरों और तटीय संसाधनों का उपयोग इस तरह किया जाता है जिससे आर्थिक विकास, रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिले, लेकिन साथ ही समुद्री पर्यावरण और Marine Ecosystem को कोई नुकसान न पहुंचे।

 चोल साम्राज्य: जब भारतीय नौसेना सबसे ताकतवर मानी जाती थी

चोल वंश को भारतीय इतिहास की सबसे मजबूत समुद्री शक्तियों में गिना जाता है। राजेंद्र चोल प्रथम ने दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय साम्राज्य तक नौसैनिक अभियान चलाए थे। इतिहासकार मानते हैं कि चोल साम्राज्य ने हिंद महासागर व्यापार मार्गों पर प्रभाव बनाया, दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति पहुंचाई और समुद्री सुरक्षा और व्यापार को साथ लेकर मॉडल तैयार किए।

ताम्र पत्र कैसे पहुंचीं नीदरलैंड?

ये ताम्र पत्र डच कंट्रोल वाले नागपट्टिनम क्षेत्र से औपनिवेशिक दौर (Colonial Era) में नीदरलैंड्स ले जाई गई थीं। बाद में इन्हें Leiden University की एशियाई लाइब्रेरी में रखा गया। अब इनकी वापसी को सिर्फ सांस्कृतिक नहीं, बल्कि  ऐतिहासिक न्याय के रूप में भी देखा जा रहा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन प्लेट्स की वापसी भारत की उस कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत दुनिया भर में मौजूद भारतीय विरासत को वापस लाने पर जोर दिया जा रहा है।

बीते कुछ वर्षों में भारत कई देशों से प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और धार्मिक अवशेष वापस ला चुका है। चोल ताम्र पत्र की वापसी इसलिए भी अहम है क्योंकि ये सिर्फ कला वस्तु नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक, प्रशासनिक और समुद्री इतिहास के मूल दस्तावेज माने जाते हैं।

0 Votes: 0 Upvotes, 0 Downvotes (0 Points)

Leave a reply

Loading Next Post...
Search Trending
Popular Now
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...