
दिल्ली सरकार सर्दियां आने से पहले ही वायु प्रदूषण को लेकर एक्शन मोड में आ चुकी है। सरकार अब एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग (AQMS) का दायरा बढ़ाकर राजधानी के 13 नए क्षेत्रों में प्रदूषण मॉनिटरिंग स्टेशन लगाएगी। इससे सरकार बड़े पैमाने पर प्रदूषण की रियल टाइम अपडेट हासिल कर पाएगी।
इन नए मॉनिटरिंग स्टेशनों का मकसद उन इलाकों तक भी प्रदूषण का सटीक डेटा पहुंचाना है, जहां अभी निगरानी कमजोर मानी जाती है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ये स्टेशन खासतौर पर दिल्ली के बाहरी इलाकों में लगाए जाएंगे, ताकि हर 5×5 किलोमीटर ग्रिड में कम से कम एक एयर मॉनिटरिंग सेंटर मौजूद हो।
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन क्या है?
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (AQMS) ऐसे हाईटेक सेंटर होते हैं, जो हवा में मौजूद प्रदूषकों जैसे PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन के स्तर को लगातार मापते हैं। ये स्टेशन मौसम से जुड़े आंकड़ों के साथ रियल टाइम में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) तैयार करते हैं, ताकि लोगों को बढ़ते प्रदूषण और सेहत पर पड़ने वाले नुकसान की समय रहते जानकारी मिल जाएं।
किन इलाकों में बनेंगे नए माॅनिटरिंग स्टेशन?
सरकार ने विकासपुरी, मुंगेशपुर, नरेला, बुराड़ी, शास्त्री पार्क, टिकरी, बदरपुर, मैदानगढ़ी, छावला और रोहिणी समेत 13 जगहों की पहचान की है। इन इलाकों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां अब तक प्रदूषण की निगरानी सीमित थी।
अभी क्या है माॅनिटरिंग स्टेशन की स्थिति?
दिल्ली में फिलहाल 47 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम कर रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजधानी के कई बाहरी इलाकों में अब भी पर्याप्त कवरेज नहीं है। अभी सरकार को और दूसरी जगहों पर माॅनिटरिंग स्टेशन लगाने पर जोर देना चाहिए। सिर्फ स्टेशन बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि डेटा की ट्रांसपेरेंसी, सही मॉनिटरिंग और रियल टाइम रिपोर्टिंग पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
पिछले साल Centre for Science and Environment (CSE) की रिपोर्ट में सामने आया था कि
क्यों जरूरी हैं नए मॉनिटरिंग स्टेशन?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशन लगने से प्रदूषण की सटीक जानकारी मिलेगी। साथ ही
सर्दी से पहले शुरू पूरा होगा काम
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने नए स्टेशनों की स्थापना के लिए टेंडर जारी कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी नए मॉनिटरिंग स्टेशन 2026 की सर्दियों से पहले चालू हो जाएं, ताकि प्रदूषण के पीक सीजन में ज्यादा सटीक डेटा मिल सके।






