अस्पतालों की सुरक्षा अब होगी और मजबूत! ICU-OT समेत हाई-रिस्क एरिया के लिए नई फायर सेफ्टी गाइडलाइंस जारी

AhmadJunaidBlogMay 6, 2026358 Views


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों के लिए संशोधित फायर और लाइफ सेफ्टी गाइडलाइंस जारी की हैं। नए नियमों में ICU और ऑपरेशन थिएटर जैसे हाई-रिस्क एरिया के लिए ज्यादा स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए गए हैं।

ये गाइडलाइंस पुराने फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाती हैं, लेकिन अब उन हालात पर खास ध्यान दिया गया है जहां मरीजों को तुरंत शिफ्ट करना मुश्किल होता है। इसमें हॉरिजॉन्टल इवैक्यूएशन और स्टेज्ड मूवमेंट जैसे प्रोसेस को विस्तार से समझाया गया है।

हाई-रिस्क यूनिट्स के लिए अलग प्रोटोकॉल

नई गाइडलाइंस में ICU, NICU, PICU और ऑपरेशन थिएटर के लिए यूनिट-स्पेशल इवैक्यूएशन प्लान अनिवार्य किए गए हैं। इन जगहों को हाई-रिस्क जोन मानते हुए अलग रणनीति तैयार करने को कहा गया है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित हो सके।

अस्पतालों को Fire Safety Committee बनाने और प्रशिक्षित Fire Safety Officer नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जिनकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी।

इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पर सख्ती

गाइडलाइंस में अस्पतालों में आग लगने की बड़ी वजह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट को बताया गया है। इसके मद्देनजर वायरिंग, उपकरण और लोड मैनेजमेंट की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया है, खासकर क्रिटिकल केयर यूनिट्स में।

इसके अलावा, हर तिमाही फायर हैजर्ड असेसमेंट और सालाना फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। अस्पतालों को हैजर्ड रजिस्टर बनाए रखने, स्टाफ ट्रेनिंग कराने और मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

देशभर में अभियान जरूरी- NDMA

कृष्णा एस. वत्सा ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी को मजबूत करने के लिए देशव्यापी अभियान जरूरी है। नियमित ऑडिट और तैयारी ही जमीनी स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

National Disaster Management Authority (NDMA) के इस बयान से साफ है कि सरकार अब इस मुद्दे पर सख्ती बढ़ाने के मूड में है।

नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुरूप कदम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ये गाइडलाइंस National Building Code के अनुरूप हैं और देशभर के हेल्थकेयर संस्थानों में सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए तैयार की गई हैं।

हाल के वर्षों में अस्पतालों में आग की घटनाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर, मेंटेनेंस और तैयारी पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में नई गाइडलाइंस को इस दिशा में एक जरूरी कदम माना जा रहा है।

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