
भारतीय दवा क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक हलचल देखने को मिली। देश की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी सन फार्मा ने अमेरिकी कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी (Organon & Co) को खरीदने का फैसला किया है। यह सौदा 11.75 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) में हुआ है, जो किसी भी भारतीय फार्मा कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण है।
सन फार्मा के बोर्ड ने इस डील को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ऑर्गेनॉन के शेयरधारकों को हर शेयर के बदले 14 डॉलर कैश मिलेंगे। साल 2021 में मर्क (Merck) से अलग हुई ऑर्गेनॉन का कारोबार महिलाओं के स्वास्थ्य और बायोसिमिलर दवाओं के क्षेत्र में काफी मजबूत है। कंपनी के पास फिलहाल 70 से ज्यादा प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो है और यह दुनिया के 140 से अधिक बाजारों में एक्टिव है।
इस बड़े कदम पर सन फार्मा के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन दिलीप सांघवी ने कहा कि यह डील एक डायवर्सिफिकेशन प्लेटफॉर्म बनाने का बेहतरीन मौका है। उन्होंने बताया कि ऑर्गेनॉन का पोर्टफोलियो और इसकी ग्लोबल पहुंच सन फार्मा के मौजूदा कारोबार को मजबूती देगी, जिससे भविष्य में टिकाऊ ग्रोथ हासिल करने में मदद मिलेगी।
सन फार्मा इस खरीदारी के लिए अपनी खुद का कैश और बैंकों से मिलने वाले कर्ज का इस्तेमाल करेगी। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, ऑर्गेनॉन का राजस्व 6.2 अरब डॉलर रहा है। इस अधिग्रहण के बाद बनने वाली नई इकाई की कुल कमाई करीब 12.4 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। साथ ही, कंपनी की मौजूदगी दुनिया के 150 देशों तक पहुंच जाएगी, जिनमें से 18 बाजार ऐसे होंगे जहां से कंपनी को 100 मिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व मिलेगा।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर कीर्ति गणोरकर ने बताया कि उनका पूरा ध्यान कारोबार की निरंतरता और बेहतर तालमेल बिठाने पर होगा। उन्होंने कहा कि ऑर्गेनॉन की प्रतिभाशाली टीम और उनके पास मौजूद संभावनाओं से आने वाले वर्षों में राजस्व बढ़ने की बड़ी उम्मीद है। इस सौदे के बाद सन फार्मा महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष तीन कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
वहीं ऑर्गेनॉन की एग्जीक्यूटिव चेयर कैरी कॉक्स ने इस सौदे को शेयरधारकों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने कई विकल्पों पर विचार करने के बाद सन फार्मा के प्रस्ताव को चुना क्योंकि यह शेयरधारकों को तत्काल और उचित मूल्य प्रदान करता है। जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसी दिग्गज संस्थाएं इस सौदे में सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। उम्मीद है कि साल 2027 की शुरुआत तक सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह अधिग्रहण पूरा हो जाएगा।






