QR कोड से जोड़े गए मजदूर, सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई नोएडा में अशांति – टेक्नोलॉजी के सहारे भड़की हिंसा

AhmadJunaidBlogApril 14, 2026358 Views


नोएडा और आसपास के इंडस्ट्रीयल इलाकों में मजदूरी को लेकर भड़की हिंसा अब महज अचानक हुआ विरोध नहीं लग रही। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरी गतिविधि सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप्स और कथित ‘कॉल सेंटर जैसे सेटअप’ के जरिए सुनियोजित तरीके से चलाई गई।

इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को बताया कि पिछले 3-4 दिनों में बड़ी संख्या में फर्जी ट्विटर हैंडल और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए। उन्होंने कहा कि एक संगठित समूह मजदूरों को भड़का रहा है और व्यवस्थित तरीके से घटनाओं को आगे बढ़ा रहा है। अब तक करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डिजिटल नेटवर्क से तेजी से जुटे लोग

जांच में पता चला है कि व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों को जोड़ा गया। खास बात यह रही कि QR कोड के माध्यम से मजदूरों को ग्रुप में जोड़ा गया, जिससे कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाई गई और पहचान छिपी रही।

पुलिस के अनुसार, नए बने सोशल मीडिया अकाउंट, एक जैसे मैसेज और बंद ग्रुप्स में बातचीत इस बात का संकेत देते हैं कि पर्दे के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि “टेक्नोलॉजी का समन्वित इस्तेमाल कर अशांति फैलाने की कोशिश हुई है।

फंडिंग और बाहरी कड़ियों की जांच

जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की फंडिंग और संभावित बाहरी कनेक्शन खंगाल रही हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या राज्य या देश के बाहर से किसी तरह की भूमिका रही है। सिंह ने कहा कि हम फंडिंग ट्रेल को ट्रेस करेंगे। अगर कोई बाहरी या क्रॉस-बॉर्डर लिंक मिला तो सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार ने बढ़ाई मजदूरी

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का ऐलान किया है, जो 1 अप्रैल से लागू माना जाएगा। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों की सैलरी अब 13,690 रुपये प्रति माह होगी, जो पहले 11,313 रुपये थी। वहीं अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मिलेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियोक्ताओं से समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने खास तौर पर महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल पर जोर दिया।

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