NEET-UG 2026 cancelled: साल 2024 पेपर लीक के बाद सुझाए गए सुधार आखिर क्यों नहीं हो पाए लागू?

AhmadJunaidBlogMay 14, 2026358 Views


NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के 22 लाख से ज्यादा मेडिकल अभ्यर्थियों के बीच चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। यह पहली बार है जब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को आयोजित होने के बाद पूरी तरह रद्द करना पड़ा है।

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इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि 2024 के पेपर लीक विवाद के बाद सुझाए गए सुधार आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए। चलिए डिटेल में जानते हैं।

2024 पेपर लीक क्या था?

NEET-UG 2024 परीक्षा 5 मई को हुई थी, जिसमें 23 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था। बाद में बिहार से पेपर लीक का मामला सामने आया। पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने बड़ी रकम लेकर छात्रों को हल किए गए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब 4 जून को घोषित नतीजों में 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक हासिल किए। 718 और 719 जैसे असामान्य स्कोर ने भी छात्रों और अभिभावकों के बीच शक पैदा किया।

बाद में National Testing Agency ने कहा कि ये अंक कुछ परीक्षा केंद्रों पर समय की कमी के कारण दिए गए ग्रेस मार्क्स की वजह से थे। जांच बाद में Central Bureau of Investigation को सौंपी गई, जिसने दावा किया कि पेपर लीक झारखंड के हजारीबाग के एक स्कूल से हुआ था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी री-टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था।

राधाकृष्णन पैनल ने दिए थे 101 सुझाव

विवाद के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इस पैनल ने एग्जामिनेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए 101 सिफारिशें दी थीं।

इनमें बायोमेट्रिक और AI आधारित पहचान, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्नपत्र, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित प्रिंटिंग, CCTV निगरानी और आउटसोर्स स्टाफ पर निर्भरता कम करने जैसे सुझाव शामिल थे।

समिति ने ‘हाइब्रिड एग्जाम मॉडल’ का भी प्रस्ताव दिया था, जिसमें परीक्षा से ठीक पहले डिजिटल माध्यम से प्रश्नपत्र भेजे जाने थे ताकि ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिम घट सकें। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इन उपायों का बड़ा हिस्सा अभी पायलट फेज में ही था।

CBI समय पर दाखिल नहीं कर सकी चार्जशीट

2024 मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। कथित मास्टरमाइंड संजीव कुमार सिंह उर्फ ‘मुखिया’ को अगस्त 2025 में डिफॉल्ट बेल मिल गई क्योंकि CBI तय 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। मुखिया पर बिहार शिक्षक भर्ती और बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती समेत कई पेपर लीक मामलों में शामिल होने के आरोप हैं।

संसदीय समिति पहले ही जता चुकी थी चिंता

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने भी NTA के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए थे।

समिति की 371वीं रिपोर्ट में कहा गया था कि 2024 में NTA द्वारा आयोजित 14 बड़ी परीक्षाओं में से कम से कम पांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। रिपोर्ट में UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG स्थगित होने, NEET-UG में पेपर लीक आरोप और CUET परिणामों में देरी का जिक्र किया गया था।

समिति ने चेतावनी दी थी कि लगातार हो रही चूक से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हो रहा है और NTA को तुरंत अपनी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

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