
आईटी सेक्टर में छंटनी के बीच Infosys ने उल्टी दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी के सीईओ सलिल पारेख (Salil Parekh) ने कहा कि पिछले एक साल में कोई लेऑफ नहीं हुआ और आगे भी ऐसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने साफ किया कि कंपनी इस साल 20,000 फ्रेशर्स को ऑनबोर्ड करने की योजना पर कायम है। इसके उलट TCS, Cognizant, HCLTech और Oracle जैसी कंपनियों ने हाल में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की है।
AI से नौकरी नहीं, काम का स्वरूप बदल रहा
परेख ने उस धारणा को खारिज किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरियां खत्म करेगा। उनके मुताबिक AI काम का दायरा बढ़ा रहा है, घटा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि फ्रेशर्स के काम की प्रकृति जरूर बदलेगी, लेकिन इंजीनियर्स की मांग बनी रहेगी।
इंफोसिस अब इंजीनियरों को AI टूल्स के साथ और बिना उनके काम करने की ट्रेनिंग दे रही है। सीईओ ने यह भी कहा कि कंपनी का टारगेट यह है कि कर्मचारी फाउंडेशन मॉडल से बने कोड को समझें, सुधारें और उसका वैल्यूएशन कर सकें।
एक्सपर्ट्स की मांग बढ़ेगी
परेख ने संकेत दिया कि जैसे-जैसे AI नॉर्मल कोडिंग को आसान बनाएगा, गहरी तकनीकी समझ और विषय विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवर ज्यादा अहम होंगे। उन्होंने कहा कि डीप नॉलेज और स्पेशलाइजेशन अब प्रीमियम स्किल बनेंगे।
रेवेन्यू में AI की हिस्सेदारी बढ़ रही
कंपनी के कुल रेवेन्यू में AI की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 5.5% है और यह तेजी से बढ़ रही है। परेख ने इसे आने वाले वर्षों का प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर बताया।
इंफोसिस इस दिशा में OpenAI और Anthropic के साथ साझेदारी मजबूत कर रही है। साथ ही, कंपनी ने ‘Topaz Fabric’ जैसे इन-हाउस प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं, ताकि बड़े पैमाने पर AI-आधारित डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जा सके।






