
Income Tax Return: 31 मई को Statement of Financial Transactions (SFT) फाइलिंग की आखिरी तारीख नजदीक आने के साथ टैक्स एक्सपर्ट ने टैक्सपेयर्स को अपने वित्तीय रिकॉर्ड ध्यान से चेक करने की सलाह दी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत PAN, डुप्लिकेट ट्रांजैक्शन एंट्री या बैंकों और म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा गलत वैल्यू रिपोर्ट करने जैसी गलतियां आपके इनकम टैक्स रिकॉर्ड में मिसमैच पैदा कर सकती हैं। इससे ITR फाइलिंग के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
क्या होता है SFT?
Statement of Financial Transactions (SFT) आयकर अधिनियम की धारा 285BA के तहत एक रिपोर्टिंग सिस्टम है। इसके जरिए बैंक, NBFC, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड ट्रस्टी, फॉरेक्स डीलर और दूसरी वित्तीय संस्थाएं Form 61A के माध्यम से बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देती हैं। यही डेटा बाद में टैक्सपेयर्स के Annual Information Statement (AIS) में दिखाई देता है।
क्यों जरूरी है AIS चेक करना?
आयकर विभाग ITR में दी गई जानकारी का मिलान AIS और दूसरे रिकॉर्ड्स से करता है। अगर किसी निवेश, ब्याज आय, डिविडेंड या प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की जानकारी AIS में अलग दिखती है, तो विभाग नोटिस भेज सकता है या रिफंड रोक सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई बार टैक्सपेयर्स सही रिटर्न फाइल करते हैं, लेकिन SFT रिपोर्टिंग में हुई गलती परेशानी बढ़ा देती है।
किन गलतियों पर रखें सबसे ज्यादा नजर?
अधिकारियों के अनुसार, SFT रिपोर्टिंग में सबसे आम समस्याएं ये हैं:
ऐसी गलतियों की वजह से AIS में गलत जानकारी दिखाई दे सकती है।
ITR पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर AIS और ITR के बीच मिसमैच हुआ तो:
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाद में सुधार कराना लंबी प्रक्रिया हो सकती है क्योंकि वित्तीय संस्थानों को अपनी SFT रिपोर्ट दोबारा संशोधित करनी पड़ सकती है।
क्या करें टैक्सपेयर्स?
एक्सपर्ट्स Assessment Year 2026-27 के लिए ITR भरने से पहले AIS और Form 26AS डाउनलोड कर जांचने की सलाह दे रहे हैं।
इन जानकारियों को खास तौर पर वेरिफाई करें:
अगर कोई गलती दिखे तो तुरंत आयकर पोर्टल पर फीडबैक दें या संबंधित बैंक/संस्था से संपर्क करें। आयकर विभाग पहले ही AY 2026-27 के लिए ITR-1, ITR-2 और ITR-4 ऑनलाइन फाइलिंग शुरू कर चुका है। ऐसे में 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले रिकॉर्ड्स मिलाना काफी अहम माना जा रहा है।





