
Emergency Fund: फाइनेंस एक्सपर्ट कई बार लोगों को किसी भी निवेश को शुरू करने से पहले इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं। यह भले ही शेयर या म्यूचुअल फंड जैसा रिटर्न न दे, लेकिन आपके पूरे फाइनेंशियल प्लान की नींव यही मजबूत करता है।
इमरजेंसी फंड वह रकम होती है जिसे अचानक आने वाले खर्चों- जैसे मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी छूटना या जरूरी रिपेयर के लिए अलग रखा जाता है। यह पैसा शॉपिंग या छुट्टियों के लिए नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में सहारा देने के लिए होता है।
बिजनेस टुडे को Wise FinServ की डायरेक्टर और COO चारू पाहुजा ने कहा कि निवेश शुरू करने से पहले थोड़ा रुककर इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है। यह सुनने में भले साधारण लगे, लेकिन यही आपकी बाकी फाइनेंशियल प्लानिंग को सुरक्षित रखता है।
वह समझाती हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश को समय देना पड़ता है। अगर ऐसे समय में अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाए और आपको निवेश निकालना पड़े, तो नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आपके पास बफर नहीं है, तो आप गलत समय पर निवेश तोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।
कितना होना चाहिए इमरजेंसी फंड?
आम तौर पर 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च जितना इमरजेंसी फंड रखना सही माना जाता है। इसमें घर का किराया या EMI, राशन, बिजली-पानी के बिल और बीमा प्रीमियम जैसे खर्च शामिल होते हैं।
चारू पाहुजा के मुताबिक इतनी रकम अलग रखें जिससे आपका घर अगले तीन से छह महीने आराम से चल सके। अगर आपकी आय स्थिर है तो तीन महीने का फंड काफी हो सकता है, लेकिन बिजनेस करने वालों या जिन पर परिवार की जिम्मेदारी है, उनके लिए 6 से 12 महीने का फंड ज्यादा सुरक्षित है।
छोटे से शुरू करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं
इमरजेंसी फंड बनाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। आप हर महीने ₹500 या ₹1,000 से भी शुरुआत कर सकते हैं। जब तीन महीने का बेसिक फंड तैयार हो जाए, तब निवेश शुरू करें और साथ-साथ फंड को बढ़ाते रहें।
कहां रखें इमरजेंसी फंड?
इस फंड का मकसद रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि सुरक्षा और तुरंत उपलब्धता है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाल सकें।
एक आसान तरीका है- करीब 30-40% पैसा सेविंग अकाउंट या स्वीप-इन FD में रखें, ताकि तुरंत इस्तेमाल हो सके। बाकी 60-70% रकम लिक्विड या ओवरनाइट म्यूचुअल फंड में डाल सकते हैं, जहां थोड़ा बेहतर रिटर्न मिलता है और जोखिम भी कम रहता है।
सेविंग अकाउंट आमतौर पर 2.5-4% रिटर्न देता है, जबकि लिक्विड फंड में पैसा एक दिन (T+1) में मिल सकता है।





