
Tata AMC: टाटा एसेट मैनेजमेंट ने सोमवार को अपना नया फंड- Titanium Equity Long-Short Fund लॉन्च किया, जो उसके टाइटेनियम स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। इस फंड का बेंचमार्क Nifty 500 Total Return Index है।
निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग विकल्पों से शुरुआत कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में केवल ₹5,000 से निवेश शुरू किया जा सकता है। वहीं SIF (Specialized Investment Fund) में निवेश के लिए PAN स्तर पर कम से कम ₹10 लाख की जरूरत होती है।
इसके अलावा PMS (Portfolio Management Services) में निवेश शुरू करने के लिए न्यूनतम ₹50 लाख चाहिए, जो आमतौर पर बड़े निवेशकों के लिए होता है।
आज से खुल गया NFO
इस फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 27 अप्रैल 2026 से खुल गया है जो 11 मई 2026 को बंद होगा।
स्ट्रेटजी
फंड का मकसद लॉन्ग और शॉर्ट दोनों पोजिशन लेकर मिड-टू-लॉन्ग टर्म में कैपिटल ग्रोथ हासिल करना है। यह नेट इक्विटी एक्सपोजर को -25% से 100% के बीच बाजार के हिसाब से एडजस्ट कर सकता है। फंड में कम से कम 80% निवेश लिस्टेड इक्विटी में रहेगा, जबकि डेरिवेटिव्स के जरिए हेजिंग और 25% तक अनहैज्ड शॉर्ट पोजिशन लेने की भी छूट होगी।
लॉन्च के मौके पर टाटा AMC के चीफ बिजनेस ऑफिसर आनंद वरदराजन ने कहा कि SIF फ्रेमवर्क ने म्यूचुअल फंड और AIF/PMS के बीच एक रणनीतिक जगह बनाई है। यह प्रोडक्ट बाजार की हर स्थिति तेजी, गिरावट या साइडवेज- में मौके तलाश सकता है। उन्होंने बताया कि फंड जरूरत पड़ने पर पूरी तरह लॉन्ग, शॉर्ट या आर्बिट्राज जैसी पोजिशन भी ले सकता है।
डायनेमिक अलोकेशन पर जोर
फंड मैनेजर सूरज नंदा के मुताबिक, यह स्कीम पारंपरिक इक्विटी फंड्स से अलग है, क्योंकि इसमें मार्केट वैल्यूएशन के हिसाब से इक्विटी एक्सपोजर घटाया-बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब बाजार अनुकूल होगा तो एक्सपोजर 100% तक बढ़ाया जा सकता है, वहीं जोखिम बढ़ने पर हेजिंग के जरिए इसे कम किया जाएगा।
इक्विटी SIF और इक्विटी म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?
इक्विटी SIF (Specialized Investment Fund) और सामान्य इक्विटी म्यूचुअल फंड में मुख्य अंतर उनकी निवेश रणनीति में होता है। इक्विटी SIF सीमित स्तर तक (लगभग 25% तक) शॉर्ट पोजीशन ले सकते हैं, यानी गिरते बाजार से भी कमाई की कोशिश करते हैं, जबकि सामान्य म्यूचुअल फंड आमतौर पर सिर्फ खरीद (लॉन्ग) पर फोकस करते हैं। इसके अलावा SIF में REITs और InVITs जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा भी ज्यादा होती है, जिससे पोर्टफोलियो में ज्यादा विविधता और लचीलापन मिलता है।






