IRCTC Char Dham Yatra: केदारनाथ के दर्शन करना अब और आसान! IRCTC लाया चारधाम यात्रा का स्पेशल टूर पैकेज – चेक करें पूरी डिटेल

AhmadJunaidBlogApril 28, 2026360 Views


Char Dham Yatra: आस्था और आध्यात्मिकता के करीब जाने का सपना देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए आईआरसीटीसी टूरिज्म ने नए टूर पैकेज की घोषणा की है। हिमालय की गोद में बसे पवित्र चारधाम- केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के दर्शन के लिए IRCTC ने स्पेशल टूर पैकेज लॉन्च किया है।

यात्रा की डिटेल और किराया

सम्बंधित ख़बरें

IRCTC द्वारा लॉन्च किया गया यह ‘चारधाम यात्रा’ पैकेज 12 रात और 13 दिन (12N/13D) का है। इस All-inclusive यात्रा की शुरुआत मात्र ₹66,350/- प्रति व्यक्ति से हो रही है।

  • पैकेज का नाम: चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra)
  • प्रस्थान स्थान (Origin): कोच्चि (Kochi)
  • प्रस्थान की तारीख: 3 जून 2026
  • यात्रा का माध्यम: कोच्चि से दिल्ली तक हवाई जहाज (Air) द्वारा और उसके आगे सड़क मार्ग (Road) द्वारा।
  • कवर किए जाने वाले स्थान: यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ।

चारों धामों का धार्मिक महत्व

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित इन चार तीर्थों को ‘हिमालयी चारधाम’ कहा जाता है। मान्यता है कि हर हिंदू को जीवन में कम से कम एक बार इन धामों की यात्रा जरूर करनी चाहिए।

1. यमुनोत्री: यमुना का पावन उद्गम

गढ़वाल हिमालय के पश्चिम में 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर देवी यमुना को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में जयपुर की महारानी गुलेरिया ने करवाया था और बाद में टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह ने इसका पुनर्निर्माण किया।

मंदिर के पास सूर्यकुंड (गर्म पानी का सोता) और दिव्य शिला स्थित है। श्रद्धालु सूर्यकुंड के गर्म पानी में मलमल के कपड़े में चावल और आलू उबालकर प्रसाद के रूप में घर ले जाते हैं।

2. गंगोत्री: गंगा की अविरल धारा

देवदार और चीड़ के जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर देवी गंगा को समर्पित है। 18वीं शताब्दी में गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने भागीरथी नदी के तट पर इस मंदिर का निर्माण कराया था। यह मंदिर भगीरथ शिला के पास स्थित है, जहां राजा भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की थी।

3. केदारनाथ: भगवान शिव का दिव्य निवास

बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित केदारनाथ मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने करवाया था। यह पांडवों द्वारा बनाए गए मंदिर के पास ही स्थित है।

मंदिर के अंदर एक शंक्वाकार चट्टान (Conical rock) को भगवान शिव के ‘सदाशिव’ रूप में पूजा जाता है। भारी पत्थरों से बना यह मंदिर आज भी शोध का विषय है कि उस समय इतने भारी स्लैब वहां कैसे पहुंचाए गए।

4. बद्रीनाथ: भगवान विष्णु का धाम

भगवान बद्रीनारायण को समर्पित यह मंदिर करीब 50 फीट ऊंचा है, जिसके शिखर पर सोने का मुलम्मा चढ़ा है। मंदिर तीन हिस्सों में बंटा है- गर्भगृह, दर्शन मंडप और सभा मंडप।

गर्भगृह में भगवान बद्रीनाथ की एक मीटर ऊंची काली पत्थर की मूर्ति है। मंदिर के प्रवेश द्वार (सिंहद्वार) के ठीक सामने भगवान के वाहन ‘गरुड़’ की मूर्ति हाथ जोड़े प्रार्थना की मुद्रा में स्थित है।



0 Votes: 0 Upvotes, 0 Downvotes (0 Points)

Leave a reply

Loading Next Post...
Search Trending
Popular Now
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...