CoinDCX के फाउंडर्स गिरफ्तार! फ्रॉड केस, फेक वेबसाइट…जानिए अब आगे क्या?

AhmadJunaidBlogMarch 24, 2026359 Views


भारतीय क्रिप्टो जगत में तब खलबली मची जब देश का एक बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) के को-फाउंडर्स सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल को ठाणे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई करीब 71.6 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में की है। जहां एक तरफ पुलिस इसे ‘आपराधिक विश्वासघात’ मान रही है, वहीं कॉइनडीसीएक्स ने साफ किया है कि उनके लीडर्स को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

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क्या है पूरा मामला और क्यों हुई गिरफ्तारी?

यह पूरा विवाद ठाणे के मुंब्रा पुलिस स्टेशन में 16 मार्च को दर्ज हुई एक एफआईआर से शुरू हुआ। एक 42 वर्षीय इंश्योरेंस एडवाइजर ने आरोप लगाया है कि अगस्त 2025 से मार्च 2026 के बीच उनके साथ 71.6 लाख रुपये की ठगी हुई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्हें क्रिप्टो निवेश पर भारी रिटर्न और कॉइनडीसीएक्स की फ्रेंचाइजी देने का लालच दिया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों फाउंडर्स को बेंगलुरु से हिरासत में लिया और ठाणे की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें 23 मार्च तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। आज यानी 23 मार्च को उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया जा रहा है।

पुलिस के आरोप और कंपनी की सफाई

पुलिस का कहना है कि पीड़ित ने कैश और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे ट्रांसफर किए थे, लेकिन न तो उन्हें वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही मूल रकम। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

दूसरी ओर, कॉइनडीसीएक्स ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘झूठा’ और ‘साजिश’ करार दिया है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि यह धोखाधड़ी उन स्कैमर्स ने की है जो कंपनी के नाम पर फर्जी वेबसाइट चला रहे हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे कभी भी थर्ड-पार्टी खातों में कैश नहीं लेते।

फर्जी वेबसाइट और पुराना साइबर अटैक

कॉइनडीसीएक्स का कहना है कि ठगों ने उनकी असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली ‘नकली साइट्स’ बनाकर पीड़ित को चूना लगाया है। कंपनी के मुताबिक, उन्होंने अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 के बीच ऐसी 1,212 फर्जी वेबसाइटों की रिपोर्ट की है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि साल 2025 में इस एक्सचेंज पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिसमें लगभग 4.4 करोड़ डॉलर की संपत्ति चोरी हो गई थी। हालांकि, तब कंपनी ने दावा किया था कि यूजर्स का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल पुलिस पैसों के लेन-देन और बातचीत के रिकॉर्ड खंगाल रही है। मुख्य जांच इस बात पर टिकी है कि क्या यह फ्रॉड सीधे कॉइनडीसीएक्स के सिस्टम से जुड़ा है या फिर किसी बाहरी गिरोह ने कंपनी का नाम इस्तेमाल कर इस ठगी को अंजाम दिया है। इस केस ने भारत के उभरते क्रिप्टो बाजार में सुरक्षा और रेगुलेशन की चुनौतियों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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