
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया है। गुरुवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर रहने से कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़ने का खतरा भी सामने आया है।
इसी दबाव के चलते भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के शेयरों में गिरावट देखी गई।
शेयरों में 4% तक गिरावट
गुरुवार को HPCL का शेयर 4.35% गिरकर 367.50 रुपये तक आ गया। वहीं BPCL 3.52% टूटकर 313.80 रुपये पर पहुंच गया। IOC का शेयर भी 4.10% फिसलकर 160.70 रुपये तक गिर गया। पिछले एक महीने में इन तीनों OMC कंपनियों के शेयर करीब 12-17% तक गिर चुके हैं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
बढ़ती अंडर-रिकवरी का दबाव
ब्रोकरेज फर्म एलारा सिक्योरिटीज के मुताबिक यदि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो OMC कंपनियों की अंडर-रिकवरी पेट्रोल पर लगभग 11.8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।
एलारा का कहना है कि यदि सरकार एलपीजी सब्सिडी नहीं बढ़ाती, तो 14.2 किलो के सिलेंडर पर लगभग 592 रुपये की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। इससे CPI महंगाई में करीब 140 बेसिस प्वाइंट का असर पड़ सकता है।
इस हफ्ते की शुरुआत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाकर 913 रुपये कर दिए गए थे, जो पहले 853 रुपये थे।
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि अगर सरकार अंडर-रिकवरी को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाती है और एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती, तो इससे CPI पर करीब 70 बेसिस प्वाइंट का सीधा असर पड़ सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव से सप्लाई चिंता
एनालिस्टों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बाजार में 400 मिलियन बैरल क्रूड जारी किया है, लेकिन डिस्चार्ज रेट करीब 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक सीमित है।
हालिया घटनाओं ने सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। 11 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन जहाजों पर हमला हुआ, जिसके बाद इस रास्ते से तेल की आवाजाही लगभग शून्य के करीब बताई जा रही है। इसके अलावा इराकी टैंकरों पर हमलों की भी खबर सामने आई है।
YES सिक्योरिटीज के हिटेश जैन का कहना है कि ईरान के लिए संघर्ष की आर्थिक लागत वैश्विक स्तर पर बढ़ाना एक प्रभावी रणनीति हो सकती है। उनके मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे या पानी के प्लांट्स पर हमले जैसे हालात क्षेत्र में बड़ा आर्थिक और मानवीय संकट पैदा कर सकते हैं।
वहीं चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद रहता है तो बाजार को संतुलित करने के लिए करीब 20 मिलियन बैरल की मांग में कमी जरूरी होगी। ब्रोकरेज का मानना है कि ऐसा परिदृश्य तब बन सकता है जब ब्रेंट क्रूड 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाए।






