
सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) का शेयर इन दिनों दबाव में है। शॉर्ट टर्म में स्टॉक पर ‘बेयर ग्रिप’ दिख रही है। पिछले दो साल में शेयर करीब 1% नीचे है। छह महीनों में 22.71% गिरावट आई है, जबकि इस साल अब तक 12% टूट चुका है।
हालांकि स्टॉक की कहानी पूरी तरह निगेटिव नहीं है। तीन साल में इसने 421% और पांच साल में 865% का रिटर्न दिया है। लेकिन बीते एक साल से यह रेंज-बाउंड कारोबार कर रहा है, जिससे निवेशकों को खास फायदा नहीं मिल पाया है।
52 Week Low के करीब भाव
ग्रीन एनर्जी स्टॉक 27 जनवरी को बने 52 वीक लो 44.86 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। टेक्नीकल संकेत भी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। शेयर 5, 10, 20, 30, 50, 100, 150 और 200 दिन के सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। इससे साफ है कि ट्रेंड फिलहाल कमजोर है और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
मजबूत ऑर्डर बुक से उम्मीद
तकनीकी दबाव के बीच कंपनी के फंडामेंटल मजबूत बताए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक ऑर्डर बुक 6.2 गीगावॉट पर पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2025 के अंत में 5.6 गीगावॉट थी। यह इशारा करता है कि बिजनेस ग्रोथ की रफ्तार बनी हुई है।
55 रुपये है अहम लेवल
बोनांजा पोर्टफोलियो में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट कुणाल कांबले 55 रुपये के स्तर को निर्णायक मानते हैं। उन्होंने कहा कि सुजलॉन फिलहाल 46-45 रुपये के मजबूत सपोर्ट जोन के पास ट्रेड कर रहा है। स्टॉक 74 रुपये से करेक्ट होकर करीब 40% की गिरावट दिखा चुका है। यह प्रमुख EMA के नीचे है, जो बेयरिश ट्रेंड को दिखाता है।
कांबले ने बताया कि RSI न्यूट्रल से फिर नीचे की ओर मुड़ गया है, जिससे कमजोरी को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर 45 रुपये के नीचे ब्रेक मिलता है तो शेयर 42 और फिर 38 रुपये तक फिसल सकता है। मौजूदा सेटअप में नई पोजिशन लेने से बचना बेहतर है। शॉर्ट टर्म उछाल को एग्जिट के मौके के रूप में देखें। जब तक शेयर 55 रुपये के ऊपर स्थिर नहीं होता, तब तक ट्रेंड बेयरिश रह सकता है।






