145 मौतों के बाद जागी सरकार! नितिन गडकरी ने स्लीपर बसों को लेकर जारी किया बड़ा और सख्त आदेश

AhmadJunaidBlogJanuary 10, 2026360 Views


पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े हादसों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 लोगों की जान जा चुकी है। खासतौर पर स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इसी के तहत स्लीपर कोच बसों के निर्माण और संचालन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है।

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परिवहन मंत्री ने की बड़ी घोषणा

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए साफ कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता मिली होगी। गडकरी ने कहा कि स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे बसों की क्वॉलिटी और सेफ्टी लेवल में सुधार होगा।

सरकार का मानना है कि अब तक कई ट्रैवल एजेंसियां लोकल बॉडी मेकर्स से अपने हिसाब से स्लीपर बसें बनवाती थीं। इन बसों में डिजाइन और निर्माण के दौरान सेफ्टी मानकों की अक्सर अनदेखी की जाती थी, जो हादसों की बड़ी वजह बनती रही।

नए नियम केवल नई बसों तक सीमित नहीं हैं। सरकार ने देश में चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी जरूरी सेफ्टी फीचर्स लगाना अनिवार्य कर दिया है।

इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर को नींद आने पर अलर्ट देने वाला सिस्टम, एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS, इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में ये फीचर्स यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इसके साथ ही सभी स्लीपर बसों के लिए AIS-052 बस बॉडी कोड और मॉडिफाइड बस बॉडी कोड का पालन करना भी जरूरी कर दिया गया है। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है। जो बसें इन मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं मिलेगी।

AIS-052 दरअसल भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन स्टैंडर्ड है, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत लागू किया है। इसमें बस के स्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े साफ नियम तय किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि इन कड़े फैसलों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और लंबी दूरी की स्लीपर बस सेवाओं में यात्रियों का भरोसा फिर से मजबूत करना है।

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