16 साल के छात्र का कमाल! NEET और JEE के पोर्टल में पकड़ी खामी, NTA भी हुआ हैरान

AhmadJunaidBlogJune 5, 2026358 Views


सिर्फ 16 साल की उम्र में दुबई में रहने वाले राइलेन अनिल ने ऐसा काम कर दिखाया है, जिससे भारत की बड़ी परीक्षा एजेंसियों को तुरंत एक्शन लेना पड़ा। सीबीएसई बोर्ड के क्लास 12 के स्टूडेंट राइलेन ने महज पांच दिनों के अंदर NEET और JEE Advanced के ऑनलाइन सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों का पता लगाया और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी। 

इंडिया टूडे को दिए इंटरव्यू में राइलेन ने बताया कि NEET की खामी खोजने में उन्हें करीब तीन घंटे लगे, जबकि JEE Advanced की खामी पकड़ने में लगभग तीन से चार घंटे का समय लगा। राइलेन अनिल का कहना है कि उन्हें आठवीं क्लास से ही कंप्यूटर सिस्टम, लिनक्स और साइबर सिक्योरिटी में रुचि रखते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने बग बाउंटी और हैकिंग गेम्स के जरिए खुद को इस क्षेत्र में बेहतर बनाया।

साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर बनने का सपना

राइलेन का सपना भविष्य में साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर या किसी बड़ी कंपनी में चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर बनने का है।इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 31 मई को सबसे पहले नीट पोर्टल में मिली खामी की जानकारी राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को भेजी। इसके कुछ देर बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इसकी जानकारी शेयर की।

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अगले दिन उन्हें NTA के अधिकारियों की तरफ से ईमेल मिला, जिसमें उनकी सराहना की गई। राइलेन के मुताबिक NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने खुद उनसे संपर्क किया, पूरी जानकारी ली और इसके बाद पोर्टल को बंद कर जरूरी सुधार किए गए। 

इसके बाद उन्होंने JEE Advanced पोर्टल में भी एक सुरक्षा खामी खोजी। राइलेन अनिल का कहना है कि उन्होंने इसकी जानकारी भी अभिषेक सिंह को दी जिन्होंने इसे IIT अधिकारियों तक पहुंचाया। कुछ ही घंटों के भीतर समस्या को ठीक कर दिया गया।

सरकारी पोर्टलों में अभी भी कई खामियां मौजूद

राइलेन ने इंटरव्यू में बताया कि सरकार और एजेंसियों की तरफ से अब तक की गई कार्रवाई से वे काफी खुश हैं। उनका मानना है कि कई सरकारी पोर्टलों में अभी भी ऐसी खामियां मौजूद हैं जिन्हें जल्द ठीक करने की जरूरत है। 

ऑनलाइन नीट परीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि NTA के पास परीक्षा को ऑनलाइन कराने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला एजेंसी को करना है। व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ ऑफलाइन परीक्षा भी ठीक है। 

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राइलेन का कहना है कि वे और उनके जैसे युवा एथिकल हैकर्स सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि उसे ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआत में डर जरूर लगा था, लेकिन जब NTA ने उनसे संपर्क किया तो उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे छात्रों को एंटी-नेशनल कहना गलत है, क्योंकि वे देश के सिस्टम को बेहतर और सुरक्षित बनाने में मदद कर रहे हैं। 

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