साइबर ठगों की अब खैर नहीं! सरकार ने ठगों को पकड़ने के लिए बैंकों को थमाया नया हथियार

AhmadJunaidBlogMay 2, 2026358 Views


देश में बढ़ते डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी और ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खाते) के इस्तेमाल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पीटीआई के रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने सभी बैंकों को निर्देश दिया कि वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बनाए गए ‘MuleHunter’ AI टूल को जल्द से जल्द अपनाएं।

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नागराजू का मानना है कि इस तकनीक की मदद से उन संदिग्ध खातों की पहचान समय रहते की जा सकेगी, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी का पैसा छिपाने के लिए करते हैं।

उच्च स्तरीय बैठक में जताई गई चिंता

हाल ही में प्रवर्तन एजेंसियों, आरबीआई और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते ग्राफ पर चिंता जताई गई। बैठक के दौरान एम. नागराजू ने खास तौर पर उन ‘म्यूल अकाउंट्स’ के बढ़ते जाल पर चर्चा की, जो साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक ही इस समस्या का सबसे सटीक समाधान है और इसीलिए बैंकों को बिना देरी किए एआई आधारित इस नए सिस्टम को अपने कामकाज में शामिल करना चाहिए।

‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ से मिली सीख

बैठक में हैदराबाद पुलिस द्वारा हाल ही में चलाए गए ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ से मिले अनुभवों और सीखों पर भी विस्तार से बात हुई। इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया कि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग कितनी जरूरी है। इसी संदर्भ में वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी शेयर करते हुए बताया कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBC) को भी पुलिस अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने सलाह दी है कि बैंक धोखाधड़ी रोकने के लिए जो कदम उठा रहे हैं, उनके बारे में पुलिस को नियमित रूप से जानकारी दें।

ग्राहक सुरक्षा पर सरकार का फोकस

साइबर अपराध के खिलाफ इस जंग में ग्राहक सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा गया है। एम. नागराजू ने कहा कि बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग को और मजबूत करना होगा ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत रिस्पॉन्स दिया जा सके।

सरकार का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षा तंत्र तैयार करना है जहां बैंकों के पास तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता हो और वे जनता के बीच साइबर जागरूकता बढ़ाकर उन्हें इन खतरों से बचा सकें।

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