
Mutual Fund Regular vs Direct Plans: जब भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए किसी प्लान को चुनते हैं तो आपके पास दो ऑप्शन आते हैं- रेगुलर प्लान या डायरेक्ट प्लान। नए निवेशकों को ज्यादातर इन दोनों के बारे में अंतर नहीं पता होता जिससे वो अंदाज के आधार पर अपने लिए फंड चुन लेते हैं। हालांकि दोनों फंड में एक बड़ा अंतर है जो सीधे आपके रिटर्न पर असर डालता है।
प्लान भले ही अलग हो लेकिन दोनों प्लान एक ही फंड में निवेश करते हैं, लेकिन इनके रिटर्न में फिर भी अंतर आ सकता है। इसकी वजह है – Expense Ratio और निवेश का तरीका। चलिए पूरी डिटेल जानते हैं।
Regular और Direct प्लान क्या होते हैं?
रेगुलर प्लान वह होता है जिसमें आप किसी एजेंट, बैंक या डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से निवेश करते हैं। इसमें आपको सलाह और सर्विस मिलती है, लेकिन इसके बदले में कमीशन देना पड़ता है।
वहीं डायरेक्ट प्लान में आप सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) से निवेश करते हैं। इसमें कोई बिचौलिया नहीं होता, इसलिए कमीशन भी नहीं देना पड़ता।
Expense Ratio का फर्क कैसे असर डालता है?
दोनों प्लान्स के बीच सबसे बड़ा अंतर Expense Ratio का होता है। रेगुलर प्लान में यह ज्यादा होता है क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। डायरेक्ट प्लान में यह कम होता है।
कम Expense Ratio का मतलब है कि आपके निवेश का ज्यादा हिस्सा आपके लिए काम करता है। यही कारण है कि लंबे समय में डायरेक्ट प्लान का रिटर्न रेगुलर प्लान से ज्यादा हो सकता है।
रिटर्न में कितना अंतर हो सकता है?
शुरुआत में यह अंतर छोटा लग सकता है, जैसे 0.5% से 1% तक। लेकिन अगर आप लंबे समय, जैसे 10-15 साल के लिए निवेश करते हैं, तो यही छोटा अंतर बड़ा बन जाता है। कंपाउंडिंग के कारण Direct प्लान में आपकी कुल कमाई ज्यादा हो सकती है।
किस निवेशक के लिए कौन सा प्लान सही?
अगर आप नए निवेशक हैं और आपको बाजार की ज्यादा समझ नहीं है, तो Regular प्लान आपके लिए सही हो सकता है क्योंकि इसमें आपको सलाह मिलती है। लेकिन अगर आपको म्यूचुअल फंड की बेसिक समझ है और आप खुद रिसर्च कर सकते हैं, तो Direct प्लान बेहतर विकल्प हो सकता है।
क्या जोखिम में कोई फर्क होता है?
नहीं, दोनों प्लान्स में निवेश एक ही फंड में होता है, इसलिए जोखिम समान रहता है। फर्क सिर्फ खर्च और रिटर्न में होता है।
निवेश से पहले क्या ध्यान रखें?
निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। अगर आप खुद निर्णय ले सकते हैं, तो डायरेक्ट प्लान से बेहतर रिटर्न पा सकते हैं। वहीं अगर आपको गाइडेंस चाहिए, तो रेगुलर प्लान चुनना गलत नहीं है।






