
जब कोई एक शहर छोड़कर दूसरे शहर में बसता है, तो उसे नए मौसम, नए ट्रैफिक और नए रहन-सहन की आदत डालनी पड़ती है। लेकिन एक युवक को बेंगलुरु से मुंबई शिफ्ट होने के बाद जिस चीज ने सबसे ज्यादा हैरान किया, वह न तो ट्रैफिक था, न किराया और न ही मौसम। बल्कि वजह थी मुंबई के ऑटो-रिक्शा चालक।
टैलेंट एक्विजिशन मैनेजर मयंक कुमार ने हाल ही में लिंक्डइन पर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि बेंगलुरु से मुंबई आने के बाद उन्हें सबसे बड़ा ‘कल्चर शॉक’ ऑटो-रिक्शा चालकों के व्यवहार से मिला।
मयंक ने बताया कि बेंगलुरु में ऑटो लेना कई बार किसी इंटरव्यू का आखिरी राउंड क्लियर करने जैसा लगता था। पहले ड्राइवर को डेस्टिनेशन बताओ, फिर उसके मना करने की संभावना, फिर किराए को लेकर अलग चर्चा। यानी एक छोटी-सी सवारी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती थी।
मुंबई का एक्सपीरियंस बिल्कुल अलग
मयंक ने बताया कि एक बार मैं शहर के एक ऐसे होटल में ठहरा हुआ था जो मुख्य सड़क से थोड़ा अंदर था। वहां से उन्हें आगे जाने के लिए कोई सवारी नहीं मिल रही थी। तभी एक ऑटो-रिक्शा चालक उनकी मदद के लिए आगे आया। ड्राइवर उन्हें ऐसी जगह तक छोड़कर गया जहां से उन्हें आसानी से ऑटो मिल सकता था। सबसे खास बात यह रही कि उसने इस मदद के बदले कोई पैसा लेने से भी इनकार कर दिया।
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यही एक्सपीरियंस मयंक के लिए यादगार बन गया और उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया। उनकी पोस्ट पर हजारों लोगों ने अलग-अलग रिएक्शन दी और मुंबई के बारे में अपने-अपने एक्सपीरियंस बताए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर किए अपने एक्सपीरियंस
लोगों ने कहा कि मुंबई में ऑटो चालक आमतौर पर मीटर से चलते हैं, यात्रियों को कम ही मना करते हैं और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए भी आगे आते हैं। एक यूजर ने लिखा, मैं पिछले दो साल से मुंबई में हूं और कई शहरों में काम कर चुका हूं। मेरे एक्सपीरियंस में मुंबई के ऑटो चालक सबसे अच्छे हैं। वे बहुत कम मना करते हैं, मीटर से चलते हैं।
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वहीं एक महिला यूजर ने लिखा, मुंबई की कुछ बातें ऐसी हैं जो आपको इस शहर से प्यार करने पर मजबूर कर देती हैं। यहां मुझे लोकल ट्रेनों, ऑटो, बसों, टैक्सियों और यहां तक कि सड़कों पर भी अनजान लोगों से मदद मिली है। एक महिला के तौर पर मुझे यहां जो सेफ्टी का एहसास होता है, वह किसी वरदान से कम नहीं है।





