
US-Japan Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ की सख्त नीति को देखते हुए कई देश यूएसए के साथ ट्रेड डील साइन कर रहे हैं। अभी इन देशों की लिस्ट में जापान भी शामिल हो गया है जिसने अमेरिका के साथ ट्रेड डील की है।
अमेरिका और जापान ने 550 बिलियन डॉलर (4,987.68 करोड़ रुपये) की ट्रेड डील साइन की है। इस डील का फोकस एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल सेक्टर पर होगा। साथ ही डील का लक्ष्य अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, चीन के प्रभाव को कम करने और ताइवान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाने पर होगा।
550 बिलियन डॉलर की ट्रेड डील
जापान और अमेरिका के बीच हुई यह ट्रेड डील कई तौर पर काफी बड़ी है। इस डील के तहत जापान अमेरिका में 550 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा।
इस इन्वेस्टमेंट से अमेरिका के इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग बेस को काफी मदद मिलेगी। पिछले कई सालों से अमेरिका का घरेलू इंडस्ट्रियल बेस मुश्किलों का सामना कर रहा है। दूसरे देशों से कॉम्पिटिशन और अमेरिकी कंपनियों द्वारा अपना काम ऑफशोर कर देना कुछ कारण हैं, जिनसे अमेरिका का घरेलू इंडस्ट्रियल बेस कमजोर हुआ है।
माना जा रहा है कि जापान की इन्वेस्टमेंट अमेरिका में हजारों हाई पे वाली नौकरियां पैदा करेगी। यह नौकरियां एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में होंगी, जिससे अमेरिका के गिरते हुए लो इंडस्ट्रियल आउटपुट वाले राज्यों को काफी मदद मिलेगी।
किन राज्यों को मिलेगी मदद ?
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि जापान के साथ हमारी बड़ी ट्रेल डील हो गई है। जापान अब आधिकारिक तौर पर और वित्तीय रूप से अमेरिका में 550 अरब डॉलर के अपने निवेश प्रतिबद्धता के पहले चरण को आगे बढ़ा रहा है।
अमेरिका के टेक्सास (Texas) राज्य में ऑयल और गैस से जुड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। ओहायो (Ohio) में एक नया गैस पावर प्लांट बनेगा, जो इतिहास में सबसे बड़ा होगा। इसके साथ ही जॉर्जिया (Georgia) राज्य में क्रिटिकल मिनरल सेक्टर में भारी निवेश किया जाएगा। ट्रंप के मुताबिक इन सभी प्रोजेक्ट्स से अमेरिका के एक्सपोर्ट्स में तेजी आएगी और अमेरिका की दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम होगी।
चीन पर कम होगी निर्भरता
आज चीन क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है। अमेरिका सहित कई देश क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर हैं। ऐसे में जापान और अमेरिका के बीच हुई इस ट्रेड डील को चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के एक रूप में भी देखा जा रहा है।
इस ट्रेड डील से अमेरिका को चीन की बढ़ती हुई रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल क्षमता को काउंटर करने में मदद मिलेगी। साथ ही इंडो पैसिफिक (Indo-Pacific) में चीन के बढ़ते कदमों पर भी रोक लगाने में यह ट्रेड डील उपयोगी साबित हो सकती है।






