
Gen Z in Mutual Funds: भारत में अब Gen Z (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका बदल रहे हैं। पहले म्यूचुअल फंड में निवेश ज्यादातर उम्रदराज और स्थिर आय वाले लोग करते थे। लेकिन अब 20-25 साल की उम्र के युवा म्यूचुअल फंड में अपने स्टाइल में एंट्री कर रहे हैं।
Gen Z स्मार्टफोन और इंटरनेट के साथ बड़ी हुई है। ये लोग ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके खुद ही सीखते हैं और निवेश करते हैं। युवा निवेशकों के बीच Groww, Zerodha, Coin जैसे प्लेटफॉर्म काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि Gen Z के लिए इनका इस्तेमाल करना आसान है।
Gen Z को अब फाइनेंशियल एडवाइजर की जरूरत नहीं पड़ती। वे YouTube वीडियोज, पॉडकास्ट और इंस्टाग्राम-ट्विटर पर फाइनेंस इंफ्लुएंसर्स को फॉलो करके म्यूचुअल फंड्स के बारे में जानकारी लेते हैं। हालांकि ये जोखिम भरा भी हो सकता है।
SIP है पहली पसंद
Systematic Investment Plan (SIP) Gen Z की सबसे पसंदीदा निवेश तकनीक है। SIP में वो मंथली ₹500 जैसी छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं जो उनके शुरुआती करियर और सीमित आय में फिट बैठता है।
Gen Z को ऑटो-डेबिट का फीचर भी पसंद आता है जिससे हर महीने निवेश अपने आप हो जाता है और निवेश की आदत बनी रहती है।
सिर्फ रिटर्न नहीं, लक्ष्य भी जरूरी
पहले की पीढ़ी सिर्फ ज्यादा रिटर्न चाहती थी, लेकिन Gen Z के लिए निवेश का मकसद होता है:
उनके लिए म्यूचुअल फंड सिर्फ पैसा कमाने का तरीका नहीं, बल्कि लाइफ गोल्स पूरा करने का जरिया भी है।
रिस्क भी लेते हैं
Gen Z को रिस्क लेने से डर नहीं लगता, इसलिए वे अक्सर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं। लेकिन वे बिना सोचे-समझे निवेश नहीं करते। ऑनलाइन रिव्यू, फंड रेटिंग और डेटा देखकर सही फंड चुनते हैं।
Gen Z भारत में म्यूचुअल फंड निवेश को डिजिटल, आसान और लक्ष्य-आधारित बना रही है। ये युवा जल्दी शुरुआत कर रहे हैं, तेजी से सीख रहे हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से अपने पैसे पर कंट्रोल ले रहे हैं।






