
वेस्ट एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रही जंग का असर दुनिया भर में एलपीजी गैस की सप्लाई पर पड़ने लगा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे भारत में आयात होने वाली एलपीजी भी प्रभावित हो गई है। इसके कारण देश में एलपीजी की सप्लाई को लेकर लोगों में चिंता और घबराहट बढ़ने लगी है।
भारत पश्चिम एशिया से भारी मात्रा में नैचुरल गैस आयात करता है, इसलिए सप्लाई में कमी सीधे घरेलू उपभोक्ताओं के जीवन पर असर डालती है। चलिए जानते हैं भारत के एलपीजी आयात का क्या गणित है।
भारत में एलपीजी का इस्तेमाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी का इस्तेमाल करता है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत रसोई और घरेलू जरूरतों में खर्च होता है, जबकि 13 प्रतिशत का इस्तेमाल रेस्टोरेंट, होटल और अन्य उद्योगों में किया जाता है। इससे साफ पता चलता है कि एलपीजी की सबसे ज्यादा मांग घरेलू उपभोक्ताओं के बीच है।
आयात पर कितना निर्भर भारत?
पीआईबी से मिली जानकारी के मुताबिक भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इन आयातों में से लगभग 90 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होता है, जो वर्तमान घटनाओं के कारण प्रभावित हुआ है।
बीते साल 2025 में भारत ने अपनी कुल एलपीजी मांग का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया था। इसमें से 92 प्रतिशत एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात की गई।
कहां से करता है भारत एलपीजी आयात?
भारत मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों से एलपीजी आयात करता है। वर्ष 2025 में सबसे अधिक एलपीजी यूएई से आयात की थी। वर्ष 2025 में भारत ने अपनी कुल एलपीजी आयात का सबसे बड़ा हिस्सा, लगभग 40 प्रतिशत, केवल यूएई से प्राप्त किया था। यह दिखाता है कि भारत अपनी एलपीजी सप्लाई में यूएई पर काफी हद तक निर्भर है।
इसके बाद दूसरे स्थान पर कतर है, जिससे भारत ने पिछले वर्ष अपनी एलपीजी का 22 प्रतिशत आयात किया। तीसरे और चौथे स्थान पर सऊदी अरब और कुवैत हैं, जहां से भारत ने क्रमश 15-15 प्रतिशत एलपीजी आयात की। इसलिए, पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव या युद्ध सीधे भारत की एलपीजी सप्लाई और कीमतों पर असर डालता है।





