India-EU ट्रेड डील का असर! 4% तक बिखरे M&M, हुंडई और मारुति के शेयर – धर्मेश कांत ने दी राय

AhmadJunaidBlogJanuary 27, 2026366 Views


भारत-यूरोपीय संघ (EU) ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच मंगलवार के कारोबारी सत्र में ऑटो शेयरों पर दबाव देखने को मिला। Mahindra & Mahindra, Hyundai Motor India और Maruti Suzuki India के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

दोपहर 3:03 बजे तक महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर 4.29% या 152.10 रुपये गिरकर 3390.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, हुंडई मोटर इंडिया का शेयर 4.20% या 95.10 रुपये गिरकर 2169.35 रुपये पर ट्रेड कर रहा था और मारुति सुजुकी इंडिया का शेयर 1.67% या 257.60 रुपये टूटकर 15212 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

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एक्सपर्ट की राय

शेयरों में आई गिरावट पर बोलते हुए चोलामंडलम सिक्योरिटीज के हेड ऑफ इन्वेस्टर्स रिसर्च, धर्मेश कांत ने कहा कि यह गिरावट भारत-EU ट्रेड डील से जुड़ी खबरों के कारण है।

बिजनेस टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा कि खबरों के मुताबिक इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटाकर पहले 40% और बाद में 10% तक लाई जा सकती है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह राहत सिर्फ 15,000 यूरो से ऊपर कीमत वाली गाड़ियों पर ही लागू होगी या नहीं।

M&M के लिए अहम है प्राइस बैंड

एक्सपर्ट ने बताया कि 15,000 यूरो की कीमत भारतीय बाजार में करीब 20-25 लाख रुपये के सेगमेंट से मेल खाती है, जहां महिंद्रा एंड महिंद्रा की मजबूत मौजूदगी है। उन्होंने कहा कि M&M की ज्यादातर SUVs इसी प्राइस रेंज में बिकती हैं। यह भी देखना अहम होगा कि ड्यूटी कट ICE गाड़ियों पर लागू होगी या EVs पर। इससे कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर का अंदाजा लगेगा।

वैल्यूएशन और प्रॉफिट बुकिंग भी वजह

एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि असर सभी ऑटो कंपनियों पर पड़ेगा, चाहे वह M&M हो, मारुति हो या हुंडई। इनमें से कई शेयर हाल में अपने ऑल-टाइम हाई के आसपास और ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे थे। ऐसे में डील के ऐलान से पहले प्रॉफिट बुकिंग भी इस गिरावट की एक वजह हो सकती है।

समझौते पर मुहर, लेकिन सवाल बाकी

भारत और EU ने हाल ही में ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी की है, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने औपचारिक रूप से मुहर लगाई। समझौते के तहत EU में बनी कारों पर टैरिफ चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा, जिसमें सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की गई है।

कांत ने कहा कि पहले फाइन प्रिंट सामने आने दीजिए, उसके बाद ही ऑटो शेयरों पर ज्यादा ठोस विश्लेषण किया जा सकेगा।

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