Food delivery graveyard video: ‘तूम भूत से डर रहे हो न…’, कब्रिस्तान में मंगवाया खाना और फिर…देखें वीडियो

AhmadJunaidBlogFebruary 4, 2026361 Views


Food delivery graveyard video: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अजीबोगरीब वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ऑनलाइन डिलीवरी और फूड ऐप्स के दौर में एक नई बहस छेड़ दी है।

वायरल क्लिप में एक डिलीवरी एजेंट को रात के अंधेरे में कब्रिस्तान के अंदर खाना पहुंचाने का ऑर्डर मिलता है। वीडियो की शुरुआत में एजेंट फोन पर महिला ग्राहक को बताता है कि वह लोकेशन पर पहुंच गया है। इस पर महिला बेहद शांति से जवाब देती है, “ठीक है, बस सीधे चलते आइए… रास्ते में किनारे एक कुत्ता बैठा होगा, उससे डरने की जरूरत नहीं है।”

जैसे ही एजेंट कुछ कदम आगे बढ़कर सामने देखता है, वह दंग रह जाता है। वह घबराकर कहता है, “मैडम, यह तो कब्रिस्तान है! अंदर पूरा अंधेरा है, मैं अंदर नहीं जाऊंगा।” लेकिन महिला टस से मस नहीं होती और जोर देकर कहती है कि वह गेट के अंदर आकर ही खाना दे दे।

“क्या लोग कब्रिस्तान में भी खाना मंगवाते हैं?”

एजेंट ने अपनी सुरक्षा और डर का हवाला देते हुए अंदर जाने से साफ इनकार कर दिया। उसने दो टूक शब्दों में महिला से कहा कि या तो वह खुद गेट पर आकर खाना ले ले, वरना वह ऑर्डर कैंसिल कर देगा।

इस बातचीत के दौरान कहानी में तब एक नया मोड़ आया जब महिला ने दावा किया कि वह अपने दोस्तों के साथ कब्रिस्तान में ‘पार्टी’ कर रही है। यह सुनकर एजेंट सन्न रह गया और उसने हैरान होकर पूछा, “क्या लोग सच में कब्रिस्तान में खाना मंगवाते हैं?”

इसके बाद महिला ने एजेंट पर डरपोक होने और भूतों से डरने का आरोप लगाया, लेकिन उसने साफ किया कि यह सिर्फ डर की बात नहीं बल्कि रात के समय कब्रिस्तान में प्रवेश करना अनुचित और असुरक्षित है।

स्क्रिप्टेड वीडियो या रोंगटे खड़े करने वाली हकीकत?

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है। हालांकि बिजनेस टुडे बाजार ने इस वीडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इंटरनेट पर इसे लेकर गुस्सा और हैरानी दोनों दिख रही है।

कुछ लोग डिलीवरी एजेंट के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि एजेंट इंसान हैं, रोबोट नहीं। वहीं, बड़ी संख्या में यूजर्स का मानना है कि यह सब ‘कंटेंट’ और व्यूज के लिए रचा गया एक नाटक या प्रंक हो सकता है। एक यूजर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि कंटेंट क्रिएटर्स को यह सोचना चाहिए कि ऐसे मजाक का सामने वाले के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है।



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