Floating vs fixed home loans Interest Rate: कौन सा ऑप्शन बचाएगा आपके लाखों रुपये और किसमें है ज्यादा जोखिम?

AhmadJunaidBlogMarch 31, 2026358 Views


Floating vs fixed home loans Interest Rate: साल 2026 में अगर आप घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि लोन लें या नहीं, बल्कि यह है कि लोन ‘कैसे’ लें। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2025 के अंत में दरों में की गई कटौती के बाद अब रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है।

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बाजार में इस समय फ्लोटिंग होम लोन 7.10% से 8.50% के बीच मिल रहे हैं, जबकि फिक्स्ड रेट वाले लोन के लिए आपको 9.50% से 11% तक का भारी ब्याज चुकाना पड़ रहा है। इन दोनों के बीच का यह अंतर ही वह कीमत है, जो आप भविष्य की अनिश्चितता से बचने के लिए चुकाते हैं।

ईएमआई का कैलकुलेशन

अगर आप 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो ब्याज दरों का छोटा सा अंतर भी बड़ा असर डालता है। 7.5% की फ्लोटिंग दर पर आपकी ईएमआई लगभग 40,000 रुपये बनती है, लेकिन 10% फिक्स्ड दर पर यही बढ़कर 48,000 रुपये हो जाती है।

हर महीने 8,000 रुपये का यह अंतर पूरे लोन की अवधि में लाखों का बोझ बढ़ा देता है। बैंकिंग एक्सपर्ट डॉ. मेहता का मानना है कि फिक्स्ड रेट चुनने वाला व्यक्ति असल में ब्याज दरों में होने वाले भविष्य के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए यह ‘प्रीमियम’ चुकाता है।

जोखिम और सुरक्षा के बीच चुनाव

फ्लोटिंग रेट सीधे तौर पर रेपो रेट से जुड़े होते हैं, इसलिए आरबीआई के फैसलों का असर आपकी जेब पर तुरंत दिखता है। अगर ब्याज दरें 0.50% भी गिरती हैं, तो आपके लाखों रुपये बच सकते हैं।

इसके उलट, दरें बढ़ने पर आपकी ईएमआई या लोन की अवधि बढ़ जाती है। वित्त सलाहकार अमित शर्मा कहते हैं कि जो परिवार हर महीने की पाई-पाई का हिसाब रखते हैं और जिनके पास एक्स्ट्रा कैश नहीं है, उनके लिए फिक्स्ड रेट बेहतर है क्योंकि वहां ईएमआई फिक्स रहती है। वहीं, जिनकी आय बढ़ रही है और जो बोनस मिलने पर लोन चुकाने की क्षमता रखते हैं, उनके लिए फ्लोटिंग रेट ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

हाइब्रिड मॉडल: एक बीच का रास्ता

2026 में कर्जदारों के बीच एक नया ट्रेंड ‘हाइब्रिड लोन’ का दिख रहा है। इसमें शुरुआती दो-तीन साल ब्याज दर फिक्स रहती है और बाद में यह फ्लोटिंग में बदल जाती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो घर खरीदने के शुरुआती सालों में फर्नीचर और शिफ्टिंग जैसे खर्चों के बीच अपनी ईएमआई को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं चाहते।

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