
भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के RTI जवाब के मुताबिक, देश के पास इतना रिजर्व है जो आयात बाधित होने की स्थिति में केवल करीब 9.5 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है। यह जानकारी इंडिया टुडे के पत्रकार अशोक उपाध्याय द्वारा एक्सेस किए गए RTI जवाब में सामने आई है, जिसने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
2004 में शुरू हुआ था SPR प्रोग्राम
सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व कार्यक्रम को 7 जनवरी 2004 को मंजूरी दी थी। इसके बाद 16 जून 2004 को Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) का गठन किया गया, जिसे इन भंडारों को विकसित और मैनेज करने की जिम्मेदारी दी गई।
अभी कितनी है क्षमता और स्टॉक?
फिलहाल भारत के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की स्टोरेज क्षमता है, जो तीन जगहों पर फैली है-
विशाखापट्टनम (1.33 MMT), मंगलुरु (1.5 MMT) और पाडुर (2.5 MMT).
सरकार ने 23 मार्च 2026 को राज्यसभा में बताया कि ISPRL के पास अभी करीब 3.372 MMT कच्चा तेल स्टॉक है, जो कुल क्षमता का लगभग 64% है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा स्थिर नहीं है और खपत व उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है।
विस्तार की योजना पर काम जारी
सरकार पहले ही SPR नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दे चुकी है। जुलाई 2021 में दो नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली थी- ओडिशा के चांदीखोल में 4 MMT और कर्नाटक के पाडुर में अतिरिक्त 2.5 MMT क्षमता। इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कुल अतिरिक्त क्षमता 6.5 MMT बढ़ेगी। इन्हें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल
हालांकि, मौजूदा 9.5 दिन का भंडार इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत अभी भी आयात पर काफी निर्भर है। किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में यह सीमित स्टॉक चुनौती बन सकता है।






