
दुनिया भर में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की महंगी कीमतों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़े कदम उठा रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को एक चिट्ठी लिखकर मांग की है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर अब 30 प्रतिशत किया जाए। संस्था का मानना है कि विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए अब फ्लेक्स फ्यूल वाले वाहनों पर पूरी ताकत से फोकस करने का समय आ गया है।
पीएम मोदी ने गिनाई भारत की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोकसभा में देश की बदलती ऊर्जा रणनीति पर बात की। उन्होंने बताया कि पिछले 11 साल में भारत ने तेल आयात करने वाले देशों का दायरा बढ़ा दिया है। पहले हम अपनी जरूरतों के लिए 27 देशों पर निर्भर थे, लेकिन आज भारत 41 देशों से ऊर्जा स्रोत जुटा रहा है।
प्रधानमंत्री ने एथेनॉल की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि एक दशक पहले पेट्रोल में सिर्फ 1-2 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। इस बदलाव की वजह से देश को हर साल करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है।
E20 के बाद अब E30 का लक्ष्य
एथेनॉल उद्योग से जुड़ी संस्था AIDA का कहना है कि भारत ने तय समय से पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत (E30) करने की जरूरत है। पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध जैसे हालातों के कारण कच्चे तेल के दाम कभी भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में एथेनॉल जैसा स्वदेशी विकल्प भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
फ्लेक्स फ्यूल और कुकिंग पर जोर
संस्था ने सरकार से अपील की है कि ब्राजील की तर्ज पर भारत में भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया जाए। ये गाड़ियां 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकती हैं। इसके साथ ही सुझाव दिया गया है कि एथेनॉल का इस्तेमाल सिर्फ गाड़ियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे घरेलू और कमर्शियल किचन में कुकिंग फ्यूल के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाए। इससे ग्रामीण इलाकों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
डीजल में भी एथेनॉल की तैयारी
सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, अब डीजल में भी एथेनॉल और इसके विकल्पों को मिलाने की तैयारी चल रही है। पिछले साल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी थी कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) डीजल में 10 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाकर परीक्षण कर रहा है।
किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया जा चुका है। AIDA अब सरकार के सामने एक विस्तृत रोडमैप पेश करना चाहती है, ताकि भारत ग्रीन और सस्टेनेबल एनर्जी की दिशा में दुनिया का नेतृत्व कर सके।






