Davos 2026: अगले 12 से 15 साल युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण, 1.2 अरब युवाओं पर सिर्फ 40 करोड़ नौकरियां: अजय बंगा

AhmadJunaidBlogJanuary 23, 2026365 Views


Davos 2026: दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से एक ऐसी खबर आई है, जिसने भविष्य के जॉब मार्केट को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है।

वर्ल्ड बैंक ग्रुप के प्रेसिडेंट अजय बंगा ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा शेयर करते हुए बताया कि अगले 12 से 15 साल युवाओं के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में करीब 1.2 अरब युवा नौकरी की उम्र (18 वर्ष) में कदम रखेंगे, लेकिन उनके सामने बाजार में सिर्फ 400 मिलियन (40 करोड़) नौकरियां ही उपलब्ध होंगी।

ब्लूमबर्ग से बातचीत के दौरान अजय बंगा ने साफ किया कि उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) में यह अंतर 800 मिलियन का होने वाला है। उन्होंने तकनीकी बदलावों पर बात करते हुए कहा कि भविष्य में एआई (AI) या कोई अन्य तकनीक इसमें थोड़ा बदलाव तो ला सकती है, लेकिन वर्ल्ड बैंक के इस अनुमान में 800 मिलियन लोगों का यह बड़ा गैप पूरी तरह गलत नहीं हो सकता।

सिंगापुर मॉडल से सुधार की उम्मीद

नौकरियां पैदा करने के समाधान पर चर्चा करते हुए अजय बंगा ने सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति थरमन इस मिशन में उनकी मदद करने को तैयार हैं, बशर्ते इस काम में पूरी ऊर्जा और निवेश लगाया जाए। बंगा का मानना है कि नौकरियां पैदा करने का काम निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) करता है, जबकि सरकार का काम इसे बढ़ावा देना है। उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार निजी क्षेत्र को बेहतर माहौल देती है, जिससे रोजगार पैदा होते हैं। खासकर छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को मिलने वाली वित्तीय मदद से आर्थिक चक्र तेजी से घूमने लगता है।

खेती और छोटे किसान हैं प्राथमिकता

अजय बंगा ने अपने पुराने दिनों और भारत में नेस्ले कंपनी के अनुभव को साझा करते हुए खेती की बदहाली पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि वह पंजाब के बेटे हैं और उन्होंने देखा है कि आज छोटे किसान खेती छोड़कर शहरों में मजदूर बनने को मजबूर हैं। बंगा ने बताया कि वर्ल्ड बैंक जॉब्स काउंसिल पांच खास क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है, जिनमें बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और छोटे किसानों की मदद सबसे ऊपर है। उनका लक्ष्य है कि किसानों को तकनीक और बाजार से जोड़ा जाए ताकि उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिले और वे पलायन न करें।

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