
ITR Refund: देशभर में कई टैक्सपेयर्स सोशल मीडिया पर आयकर रिफंड में देरी को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। कई लोगों को रिटर्न फाइल किए हफ्तों या महीनों हो गए हैं लेकिन इसके बाद भी रिफंड अब तक नहीं मिला है।
आयकर विभाग की इस तरह की देरी पहले भी देखी गई है, लेकिन इस बार तकनीकी और प्रोसेस से जुड़ी दिक्कतों की वजह से लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है।
क्यों अटक रहा है रिफंड?
रिफंड में देरी के कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले, अगर आपका बैंक खाता प्री-वैलिडेट नहीं है तो रिफंड मिलने में दिक्कत हो सकती है।
इसके अलावा, अगर बैंक खाते का नाम और आपके PAN में मेल नहीं खाता या IFSC कोड गलत दर्ज किया गया हो, तो भी रिफंड रुक सकता है।
कभी-कभी बंद हो चुका बैंक खाता देने की वजह से भी पैसा वापस नहीं आता। साथ ही, अगर आपका PAN आधार से लिंक नहीं है या PAN इनऑपरेटिव है, तो भी आयकर विभाग रिफंड रोक सकता है।
इसके अलावा, ITR फाइल करने के 30 दिन के अंदर ई-वेरिफाई न करने पर भी रिफंड प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। इसलिए इन सभी बातों का सही होना बहुत जरूरी है।
रिफंड मिलने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के 2 से 5 हफ्तों के अंदर रिफंड मिल जाता है। साधारण रिटर्न जल्दी प्रोसेस होते हैं, लेकिन अगर रिटर्न में कोई जानकारी मेल नहीं खाती तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है।
रिफंड स्टेटस कैसे चेक करें?
क्या 50,000 रुपये से ज्यादा का रिफंड अटक सकता है?
हां, बड़ी रकम वाले रिफंड पर विभाग अतिरिक्त जांच करता है, जिससे समय बढ़ सकता है। इसलिए पैन, आधार और बैंक डिटेल्स सही रखना जरूरी है।
टीडीएस रिफंड कैसे क्लेम करें?
इसके लिए ITR फाइल और ई-वेरिफाई करना अनिवार्य है। साथ ही Form 26AS में टीडीएस की एंट्री सही दिखनी चाहिए। अगर मिसमैच हो तो डिडक्टर से सुधार करवाना जरूरी है।
रिफंड पर कोई लिमिट है क्या?
नहीं। जितना टैक्स ज्यादा जमा हुआ है (TDS, एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स), उतना वापस मिलेगा। देरी होने पर विभाग 0.5% प्रति माह की दर से ब्याज भी देता है।






