
एआई तकनीक की दुनिया में छोटे और अधिक उन्नत उपकरण बनाने की दौड़ के बीच चीन ने एक ऐसा माइक्रो ड्रोन पेश किया है, जिसने प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चीन की National University of Defense Technology (NUDT) ने मच्छर जैसे आकार का एक माइक्रो ड्रोन विकसित किया है, जिसका वजन केवल 0.3 ग्राम बताया गया है। यह ड्रोन इतना छोटा है कि पहली नजर में किसी कीड़े या पत्ती जैसा दिखाई देता है।
मच्छर जैसा आकार, सेंसर से लैस डिजाइन
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह माइक्रो ड्रोन लगभग 1.3 से 2 सेंटीमीटर लंबा है और इसमें पत्ती के आकार के छोटे पंख लगाए गए हैं। इसका पतला ढांचा और बायोनिक डिजाइन इसे वास्तविक कीट जैसा दिखाने में मदद करता है। इसके भीतर सूक्ष्म सेंसर लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल निगरानी और जानकारी जुटाने जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। चीन के सरकारी सैन्य चैनल CCTV-7 पर इसका प्रदर्शन भी किया गया था।
रडार से बच निकलने का दावा
इस ड्रोन की सबसे चर्चित विशेषता इसका बेहद छोटा आकार है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी छोटी वस्तु को पारंपरिक रडार प्रणालियों से पहचानना कठिन हो सकता है। इसी वजह से इसे संवेदनशील इलाकों में गुप्त निगरानी और विशेष मिशनों के लिए उपयोगी माना जा रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह खिड़कियों, छोटे छिद्रों या संकरे स्थानों तक पहुंच सकता है, जहां बड़े ड्रोन नहीं पहुंच पाते।
तकनीक के सामने बड़ी चुनौतियां भी
हालांकि इस तकनीक को लेकर उत्साह के साथ कई सवाल भी उठ रहे हैं। रक्षा और ड्रोन विशेषज्ञों का कहना है कि इतने छोटे आकार के कारण इसमें बड़ी बैटरी नहीं लगाई जा सकती, जिससे इसकी उड़ान अवधि सीमित रहती है। इसके अलावा 0.3 ग्राम वजन होने के कारण हवा के झोंके, एयर कंडीशनर की हवा या अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियां इसकी उड़ान को प्रभावित कर सकती हैं। संचार क्षमता और पेलोड की सीमाएं भी इसके व्यावहारिक इस्तेमाल को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
प्राइवेसी और सुरक्षा पर बढ़ी बहस
इस ड्रोन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है। कई यूजर्स का मानना है कि भविष्य में ऐसे उपकरण निजी निगरानी और जासूसी के नए खतरे पैदा कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब “कंप्यूटर बग” सचमुच उड़ने लगे हैं। कुल मिलाकर, चीन का यह मच्छर जैसा ड्रोन माइक्रो-रोबोटिक्स और निगरानी तकनीक की नई दिशा दिखाता है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और निजता से जुड़े सवाल भी खड़े करता है।





