
कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एनडीए की अहम बैठक के दौरान एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। बैठक के दौरान पीएम मोदी को झालमुड़ी खाते हुए देखा गया। इससे पहले भी वह पश्चिम बंगाल में चुनावी रैलियों के दौरान झालमुड़ी का स्वाद लेते नजर आ चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी को झालमुड़ी इतनी पसंद क्यों है?
पीएम को क्यों है झालमुड़ी इतना पसंद?
प्रधानमंत्री मोदी अपनी सादगी और अनुशासित जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। सामान्य परिवार से आने वाले मोदी हमेशा भारतीय परंपराओं और स्थानीय खानपान से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें भारी-भरकम या विदेशी व्यंजनों की बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक खाद्य पदार्थ ज्यादा पसंद आते हैं। झालमुड़ी भी उन्हीं में से एक है, जो भारतीय स्ट्रीट फूड संस्कृति का अहम हिस्सा मानी जाती है।
स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल
पीएम मोदी अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते हैं। उनकी व्यस्त दिनचर्या के बीच ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता मिलती है जो हल्के होने के साथ ऊर्जा भी दें। झालमुड़ी मुरमुरे, भुने चने, मूंगफली, उबले आलू, हल्के मसालों और सरसों के तेल से तैयार की जाती है।
यह तली-भुनी नहीं होती और इसमें कैलोरी भी कम होती है। यही कारण है कि यह आसानी से पच जाती है और शरीर को भारीपन महसूस नहीं होने देती। काम के बीच हल्की भूख मिटाने के लिए यह एक बेहतरीन ऑप्शन माना जाता है।
‘लोकल फॉर वोकल’ की सोच से भी जुड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से स्थानीय उत्पादों और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं। पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध झालमुड़ी केवल एक स्नैक नहीं, बल्कि वहां की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। मोदी जब भी देश के विभिन्न राज्यों का दौरा करते हैं, वहां के स्थानीय व्यंजनों की सराहना करते दिखाई देते हैं। झालमुड़ी के प्रति उनका लगाव भी इसी सोच को दर्शाता है।
झालमुड़ी का स्वाद, उसकी सादगी, स्वास्थ्य के लिए अनुकूल गुण और स्थानीय संस्कृति से उसका जुड़ाव ही वे प्रमुख कारण हैं, जिनकी वजह से यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा स्नैक्स में शामिल है। यही वजह है कि समय-समय पर उन्हें इस चटपटे और हल्के भारतीय स्नैक का आनंद लेते देखा जाता है।






