
ग्लोबल लेवल पर इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ने, इंडस्ट्रियल रिकवरी और एनर्जी ट्रांजिशन की मांग तेज होने के बीच 2026 में मेटल और कमोडिटी आधारित म्यूचुअल फंड्स फिर से चर्चा में हैं।
स्टील, एल्युमीनियम, माइनिंग और एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में बढ़ती दिलचस्पी के चलते निवेशक अब ऐसे फंड्स की रिटर्न को लेकर फिर से वैल्यूएशन कर रहे हैं।
क्या इन फंड्स में निवेश करना सही?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ग्लोबल कमोडिटी साइकल मजबूत बना रहता है, तो इन फंड्स को आने वाले वर्षों में फायदा मिल सकता है। हालांकि, यह कैटेगरी अभी भी हाई-रिस्क और काफी उतार-चढ़ाव वाली मानी जाती है।
बिजनेस टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के प्रोत्साहन उपाय, मैन्युफैक्चरिंग रिकवरी, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में तेजी जैसी वजहें कमोडिटी कीमतों को सपोर्ट कर सकती हैं।
हालांकि आर्थिक सुस्ती या कमोडिटी कीमतों में गिरावट के दौरान ऐसे फंड्स में तेज गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसलिए इन्हें लंबी अवधि और ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
ICICI Prudential Commodities Fund को इस कैटेगरी में अन्य फंड्स की तुलना में संतुलित फंड माना जा रहा है। यह फंड सिर्फ मेटल्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि मेटल्स एंड माइनिंग, केमिकल्स, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और कैपिटल गुड्स सेक्टर में निवेश करता है।
इसके पोर्टफोलियो में JSW Steel, Hindalco Industries और Jindal Stainless जैसी कंपनियां शामिल हैं। फंड ने पिछले एक साल में 22.53% रिटर्न दिया है। शुरुआत से अब तक इसका सालाना रिटर्न 26.74% रहा है।
DSP Mutual Fund का DSP Natural Resources & New Energy Fund पारंपरिक कमोडिटी निवेश के साथ क्लीन एनर्जी थीम को भी जोड़ता है।
इस फंड का बड़ा हिस्सा एनर्जी और बेसिक मटेरियल सेक्टर में निवेशित है। इसके प्रमुख निवेशों में Tata Steel, ONGC और Oil India शामिल हैं।
फंड ने पिछले एक साल में 33.03% रिटर्न दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फंड उन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है जो कमोडिटी और ग्रीन एनर्जी दोनों थीम में एक्सपोजर चाहते हैं।
SBI Mutual Fund का SBI Comma Fund मेटल्स, ऑयल एंड गैस, पावर और कंस्ट्रक्शन मटेरियल सेक्टर में निवेश करता है।
इसके प्रमुख होल्डिंग्स में Reliance Industries, Tata Steel, ONGC और Oil India शामिल हैं। हालांकि फंड ने एक और तीन साल में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन लंबी अवधि में यह अपने बेंचमार्क से पीछे रहा है।






