Ant smuggling case: ₹22 हजार की एक चींटी! तस्करी के जरिए चीन भेजी जा रही थीं ये खास चींटियां, बरामद खेप की कीमत ₹9.5 करोड़

AhmadJunaidBlogMay 26, 2026362 Views


Messor cephalotes: दुनिया में अब वन्यजीवों की तस्करी सिर्फ हाथी के दांत, गैंडे के सींग या दुर्लभ जानवरों तक सीमित नहीं रह गई है। अब इस काले कारोबार में छोटी-सी दिखने वाली चींटियां भी शामिल हो चुकी हैं। हाल ही में केन्या के नैरोबी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने एक ऐसी तस्करी का खुलासा किया जिसने सभी को चौंका दिया। यहां टेस्ट ट्यूबों में पैक की गई हजारों जिंदा चींटियां चीन भेजी जा रही थीं। 

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पहली नजर में यह मामला मामूली लग सकता है, लेकिन पकड़ी गई चींटियां बेहद खास प्रजाति की थीं। इनका नाम Messor cephalotes है जिन्हें विशाल अफ्रीकी हार्वेस्टर चींटी कहा जाता है। यह प्रजाति अब यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कलेक्टर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।  

क्यों बढ़ रहा चींटी पालने का शौक?

दरअसल, पिछले कुछ सालों में विदेशी चींटियों को पालने का शौक तेजी से बढ़ा है। लोग ट्रांसपेरेंट आर्टिफिशियल हाउस, जिन्हें फॉर्मिकारियम कहा जाता है, में पूरी चींटी कॉलोनी रखते हैं और उनके काम करने का तरीका देखते हैं। चींटियों का सुरंग बनाना, भोजन इकट्ठा करना, कॉलोनी को व्यवस्थित करना और रक्षा करना लोगों को काफी मजेदार लगता है

चींटी का एग्रेसिव नेचर बनाता है खास

विशाल अफ्रीकी हार्वेस्टर चींटियां इस दुनिया में बेहद प्रीमियम मानी जाती हैं। इन्हें कीटों की दुनिया का सुपरकार तक कहा जाता है। इनका लाल और काला रंग, बड़ा आकार और एग्रेसिव नेचर इन्हें खास बनाता है। काम करने वाली चींटियां लगभग 19 मिमी तक लंबी हो सकती हैं, जबकि रानी चींटी 2.5 सेंटीमीटर तक पहुंच सकती है। 

9.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की चींटी किया बरामद

सबसे बड़ी बात यह है कि इस कारोबार में भारी मुनाफा मिलता है। पूर्वी अफ्रीका में तस्कर इन रानी चींटियों को बेहद कम कीमत पर हासिल कर लेते हैं, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में एक रानी चींटी की कीमत लगभग 233 डॉलर यानी करीब 22 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। नैरोबी से पकड़ी गई खेप में 2,200 रानी चींटियां थीं, जिनकी कुल कीमत 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.5 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती थी। 

चींटियों की तस्करी अपराधियों के लिए इसलिए भी आसान बन रही है क्योंकि इन्हें छोटे टेस्ट ट्यूबों में छुपाकर ले जाया जा सकता है। ये न तो आवाज करती हैं और न ही आसानी से पकड़ी जाती हैं। कई बार इन पर वन्यजीव संरक्षण कानून भी साफ तौर पर लागू नहीं होते, जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। 

इकोसिस्टम पर मंडराता खतरा

एक और बड़ी चिंता यह है कि तस्कर खास तौर पर रानी चींटियों को निशाना बनाते हैं। रानी चींटी पूरी कॉलोनी की रीढ़ होती है क्योंकि वही अंडे देती है और पूरी आबादी को आगे बढ़ाती है। अगर बड़ी संख्या में रानी चींटियों को जंगलों से निकाल लिया जाए, तो इससे पूरे लोकल इकोसिस्टम पर असर पड़ सकता है। 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये चींटियां मिट्टी को उपजाऊ बनाने, बीज फैलाने और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अगर इनकी संख्या घटती है, तो इसका असर पूरे एनवायरनमेंट साइकिल पर पड़ेगा।

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