Raja Ravi Varma Painting: ₹1,67,20,00,000 में बिकी यशोदा और कृष्णा की ये पेंटिंग – इस भारतीय ने खरीदा

AhmadJunaidBlogApril 3, 2026359 Views


भारतीय कला जगत के लिए बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सैफरनआर्ट (Saffronart) की स्प्रिंग ऑक्शन में विख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा की ‘यशोदा और कृष्णा’ की पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये (करीब 1.79 करोड़ डॉलर) में बिकी। 

यह किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे बड़ी कीमत है, जिसने बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है।

भारतीय कला की नई परिभाषा

1890 के दशक में बनाई गई यह पेंटिंग मां के प्यार और वात्सल्य का सबसे सुंदर उदाहरण मानी जाती है। इसमें माता यशोदा की गोद में नन्हें कृष्ण को दिखाया गया है, जिसकी छवि हम पिछले सौ सालों से कैलेंडर और तस्वीरों में देखते आए हैं।

सैफरनआर्ट की प्रेसिडेंट और को-फाउंडर मीनल वजीरानी ने इस बिक्री पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महान कला हमेशा अपनी शाश्वत कीमत साबित करती है। उनके अनुसार, यह रिकॉर्ड न केवल बाजार के लिए एक माइलस्टोन है, बल्कि भारतीय कला के प्रति लोगों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव को भी दिखाता है।

विदेशी तकनीक और भारतीय आत्मा का मिलन

राजा रवि वर्मा कला की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव लाए थे। उन्होंने यूरोपीय तेल चित्रकला (Oil Painting) की तकनीक को भारतीय पौराणिक कहानियों के साथ जोड़ा। उनकी इसी खूबी ने भारतीयों को अपने देवी-देवताओं की कल्पना करने का एक नया और आधुनिक तरीका दिया। यही कारण है कि उनकी पेंटिंग्स की मांग हमेशा से रही है।

इससे पहले एम.एफ. हुसैन की ‘ग्राम यात्रा’ 118 करोड़ रुपये में बिकी थी, लेकिन रवि वर्मा की इस कृति ने उस रिकॉर्ड को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है।

इस भारतीय ने खरीदी ये पेंटिंग

इस बेशकीमती पेंटिंग को दिग्गज उद्योगपति और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एमडी साइरस पूनावाला ने खरीदा है। पूनावाला ने इसे ‘राष्ट्रीय धरोहर’ बताते हुए कहा कि वह इसे समय-समय पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध कराएंगे।

कला के प्रति उनका प्रेम पुराना है; इससे पहले 2017 में उन्होंने महात्मा गांधी का एक पेंसिल स्केच भी खरीदा था ताकि वह भारत में रहे। पूनावाला परिवार अपनी कला संग्रह के लिए मशहूर है, जिसमें वैन गॉग और पिकासो जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ-साथ रजा और शेरगिल जैसे भारतीय दिग्गजों की कृतियां शामिल हैं।

निवेश के रूप में भारतीय कला

इस बड़ी नीलामी ने भारतीय आर्ट मार्केट को एक नई दिशा दी है। डीएजी (DAG) के सीईओ और एमडी आशीष आनंद का मानना है कि यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि पूरी कैटेगरी की नई परिभाषा है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ल्ड रिकॉर्ड का असर पूरे बाजार पर पड़ेगा और अब लोग भारतीय कला को केवल सजावट की वस्तु नहीं, बल्कि एक गंभीर ‘फाइनेंशियल एसेट’ के रूप में देखेंगे। 

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