Google Emergency Location Service:  गूगल ने लॉन्च किया नया Emergency Location Service! मुश्किल समय में बिना इंटरनेट भेज सकेंगे सटीक लोकेशन

AhmadJunaidBlogDecember 23, 2025364 Views


Google Emergency Location Service: मुश्किल वक्त में जब एक-एक सेकंड कीमती होता है, तब अक्सर अपनी सही लोकेशन बता पाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी समस्या का समाधान करते हुए गूगल ने भारत में एंड्रॉइड यूजर्स के लिए अपनी ‘इमरजेंसी लोकेशन सर्विस’ (ELS) शुरू कर दी है।

इसकी सबसे खास बात यह है कि मुश्किल के समय पुलिस या एम्बुलेंस को फोन करते ही आपकी सटीक लोकेशन खुद-ब-खुद उन तक पहुंच जाएगी। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने इस सिस्टम को पूरी तरह लागू कर दिया है।

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कैसे काम करता है ये फीचर?

गूगल के प्रवक्ता के अनुसार, यह फीचर एंड्रॉइड 6 और उसके बाद के सभी वर्जन पर चलने वाले स्मार्टफोन्स में इनबिल्ट है। जब भी कोई यूजर पुलिस (112), स्वास्थ्य सेवा या फायर ब्रिगेड को कॉल या मैसेज करेगा, ELS एक्टिव हो जाएगा।

यह तकनीक फोन के जीपीएस, वाई-फाई और सेलुलर नेटवर्क का डेटा इस्तेमाल करके यूजर की सटीक स्थिति का पता लगाती है। दावा है कि यह 50 मीटर के दायरे तक की बिल्कुल सही जानकारी दे सकती है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पर्ट टेलीकॉम सॉल्यूशंस के साथ मिलकर इस सेवा को अपने 112 इमरजेंसी नंबर के साथ जोड़ा है।

डेटा और सुरक्षा का भरोसा

अक्सर प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं, लेकिन गूगल ने साफ किया है कि यह सर्विस पूरी तरह सुरक्षित है। कंपनी के मुताबिक, यूजर की लोकेशन का डेटा सीधे संबंधित अधिकारियों के पास जाता है और गूगल इसे न तो इकट्ठा करता है और न ही कहीं और शेयर करता है।

यह फीचर केवल तभी काम करता है जब यूजर खुद मदद के लिए फोन मिलाता है। अब तक दुनिया भर में इस सर्विस की मदद से 20 लाख से ज्यादा कॉल्स और मैसेज सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिनमें वे कॉल्स भी शामिल हैं जो कनेक्ट होने के कुछ ही सेकंड बाद कट गई थीं।

हाल ही में इमरजेंसी लाइव वीडियो फीचर आया था

गूगल ने हाल ही में ‘इमरजेंसी लाइव वीडियो’ फीचर भी पेश किया था। इसके जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्डर कॉल के दौरान यूजर से कैमरा फीड की मांग कर सकता है।

जैसे ही स्क्रीन पर इसकी रिक्वेस्ट आएगी, यूजर एक सिंगल टैप से अपने फोन का कैमरा एक्सेस दे पाएगा। इससे मौके पर मौजूद हालात को समझने में पुलिस और डॉक्टरों को काफी आसानी होगी। हालांकि, यह सेवा फिलहाल उन्हीं राज्यों में उपलब्ध होगी जहां की सरकारें इसे अपने सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेंगी।

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