
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं के बीच देश के लिए एक राहत भरी खबर आई है। बिजनेस टुडे के रिपोर्ट के अनुसार सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर रिकॉर्ड 1,202 बैरल प्रतिदिन कर दिया है। यह पिछले साल के 705 बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 70 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब ग्लोबल तेल आपूर्ति अनिश्चित बनी हुई है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर दबाव बढ़ रहा है।
एडवांस तकनीक से बढ़ा उत्पादन
वित्त वर्ष 2025-26 में ऑयल इंडिया ने राजस्थान फील्ड से 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो पिछले साल 32,787 मीट्रिक टन था। इस बढ़ोतरी के पीछे Cyclic Steam Stimulation (CSS) जैसी आधुनिक तकनीकों का बड़ा योगदान रहा। एक अधिकारी ने कहा कि थार की जटिल भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों के बावजूद यह उपलब्धि अहम है और यह दिखाती है कि असामान्य संसाधन भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
कंपनी ने 19 कुओं में CSS ऑपरेशन किए, जो पिछले साल से 72 प्रतिशत ज्यादा हैं। साथ ही 13 नए कुएं भी खोदे गए।
नई तकनीकों का प्रयोग
ऑयल इंडिया ने पहली बार फिशबोन ड्रिलिंग और बेयरफुट कंप्लीशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा इलेक्ट्रिक डाउनहोल हीटर, हाइड्रोलिक सकर रॉड पंप और हाई-टेम्परेचर वेलहेड्स जैसे उपकरणों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद की।
थार क्षेत्र का कच्चा तेल अधिक गाढ़ा (हाई विस्कोसिटी) है, जिसके कारण पारंपरिक तकनीकें काम नहीं करतीं। इस चुनौती से निपटने के लिए कंपनी ने डाइल्यूएंट इंजेक्शन और आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम अपनाए।
जैसलमेर के बाघेवाला फील्ड से तेल को टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा स्थित ओएनजीसी सुविधाओं तक ले जाया जाता है। वहां से पाइपलाइन के जरिए इसे इंडियन ऑयल के कोयली रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है।
सरकार ने भी भरोसा दिलाया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर चल रही हैं और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।






