
आरबीआई ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही स्थिर रखने का फैसला किया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ पॉलिसी स्टांस भी कायम रखा है, जिससे महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
गवर्नर ने कहा कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (STF) रेट 5 फीसदी पर स्थिर है। इसके साथ ही मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट भी 5 फीसदी पर ही बने रहेंगे।
वैश्विक अनिश्चितताओं का दबाव
मल्होत्रा ने साफ किया कि ग्लोबल ऊर्जा बाजार और फर्टिलाइजर में जारी बाधाएं भारत के राजकोषीय घाटे पर दबाव डाल सकती हैं। उन्होंने कहा कि कमजोर वैश्विक ग्रोथ आउटलुक से एक्सटर्नल डिमांड घट सकती है और रेमिटेंस फ्लो भी प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचाव की रिस्क एवर्जन घरेलू लिक्विडिटी पर असर डाल सकती है। उनके मुताबिक, जारी भू-राजनीतिक संघर्ष ने आर्थिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है।
मार्च के बाद बदले हालात
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वेस्ट एशिया में संघर्ष बढ़ने से पहले भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी, जहां ग्रोथ तेज और महंगाई नियंत्रित थी। लेकिन मार्च में हालात बिगड़े, जब संघर्ष का दायरा बढ़ा और स्थिति और गंभीर हुई।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद इस समय पहले के संकटों की तुलना में ज्यादा मजबूत है, जिससे यह झटकों का सामना बेहतर तरीके से कर सकती है।
दरों में पहले ही हो चुकी है कटौती
केंद्रीय बैंक फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। पिछली बैठक फरवरी 2026 में भी आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा था।






