
कतर द्वारा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन रोकने के बाद भारत ने कई उद्योगों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई कम कर दी है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल-गैस की आपूर्ति में संभावित रुकावट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सोमवार देर रात कंपनियों को गैस सप्लाई में कटौती की सूचना दे दी गई, ताकि वे आने वाले दिनों में संभावित कमी के लिए तैयारी कर सकें।
कतर ने रोका गैस उत्पादन
कतर ने अपने देश में एलएनजी के उत्पादन को पूरी तरह से रोक दिया है। यह फैसला ईरान द्वारा कतर समेत मिडिल ईस्ट के बाकी देशों पर लगातार हमलों के बीच लिया गया है। कतर के फैसले से दुनिया भर के देशों में नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित होगी, साथ ही नेचुरल गैस की कीमतों में भी भारी उछाल आएगा।
भारत दुनिया का नंबर 4 सबसे बड़ा एलएनजी खरीदार है और अपनी इस एलएनजी डिमांड के लिए भारत मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में बढ़ती हुई जंग के चलते भारत की घरेलू सप्लाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
भारतीय कंपनियों ने ग्राहकों को किया आगाह
सूत्रों के अनुसार पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने देश की सबसे बड़ी गैस मार्केटिंग कंपनी गेल समेत अन्य कंपनियों को गैस की कम होती सप्लाई के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद गेल और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कस्टमर्स को कम होती गैस सप्लाई के बारे में जानकारी दी। ऐसा माना जा रहा है कि गैस की सप्लाई में 10 से 30 फीसदी की कमी आई है। इस कमी को देखते हुए भारतीय कंपनियों ने अपने ग्राहकों को भेजी जाने वाली गैस पर मिनिमम लिफ्टिंग क्वांटिटी की सीमा लगा दी है। इसके चलते कंपनियां कस्टमर्स को न्यूनतम गैस की सप्लाई जारी रखेंगी, जिससे उनका कॉन्ट्रैक्ट भी भंग नहीं होगा और उन्हें किसी तरह की पेनल्टी भी नहीं भरनी होगी।
स्पॉट टेंडर्स के जरिए खरीदेंगे नए कार्गो
गैस की सप्लाई में कमी के चलते आईओसी, गेल और पेट्रोनेट एलएनजी जैसी कंपनियां स्पॉट टेंडर्स के जरिए नए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो खरीदने पर विचार कर रही हैं। स्पॉट टेंडर्स के जरिए कंपनियां एलएनजी कार्गो को तुरंत खरीद सकती हैं, बिना किसी लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के। हालांकि इसमें कीमत ज्यादा हो सकती है।
खाड़ी में चल रहे युद्ध के चलते पहले ही जहाज द्वारा सामान भेजने और इंश्योरेंस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी आई है। इसके साथ ही स्पॉट एलएनजी की कीमतें भी लगातार ऊपर जा रही हैं। फिलहाल के लिए कंपनियां इस कम होती गैस सप्लाई के असर को प्रबंधित करने में जुटी हुई हैं।






