
इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में जनवरी 2026 के दौरान निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी, लेकिन निवेशकों का भरोसा अब भी मजबूत बना हुआ है। Association of Mutual Funds in India (AMFI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी फंड्स में नेट फ्लो घटकर 24,029 करोड़ रुपये रहा, जो दिसंबर के 28,054 करोड़ रुपये से करीब 14 फीसदी कम है। यह गिरावट प्रॉफिट बुकिंग और सतर्क रुख को दिखाती है, न कि इक्विटी से बड़े पैमाने पर बाहर निकलने को।
इक्विटी की पकड़ बरकरार
मंथली गिरावट के बावजूद इक्विटी फंड्स का इंडस्ट्री में दबदबा बना हुआ है। 31 जनवरी 2026 तक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 34.86 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि डेट स्कीम्स का AUM 18.90 लाख करोड़ रुपये पर था।
जनवरी में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री कुल मिलाकर नेट निवेश के मोड में लौटी। सभी कैटेगरी मिलाकर नेट इनफ्लो 1.56 लाख करोड़ रुपये रहा। इसका बड़ा हिस्सा डेट फंड्स से आया, जहां 74,827 करोड़ रुपये का नेट निवेश मिला। दिसंबर में भारी निकासी के बाद कॉरपोरेट्स और संस्थागत निवेशकों ने दोबारा कैश निवेश किया।
लार्जकैप मजबूत, मिड और स्मॉल में नरमी
इक्विटी कैटेगरी में लार्जकैप फंड्स की स्थिति सुधरी है। इनमें निवेश बढ़कर 2,005 करोड़ रुपये हो गया, जो दिसंबर में 1,567 करोड़ रुपये था। इसके उलट, मिडकैप फंड्स में निवेश घटकर 3,185 करोड़ रुपये और स्मॉलकैप फंड्स में 2,942 करोड़ रुपये रहा। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स ने हल्की बढ़त दिखाते हुए 1,043 करोड़ रुपये जुटाए।
डेट और हाइब्रिड फंड्स
हालांकि कुल डेट इनफ्लो मजबूत रहा, लेकिन क्रेडिट रिस्क फंड्स से 126 करोड़ रुपये की निकासी जारी रही। कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स से 11,473 करोड़ रुपये बाहर निकले। वहीं, हाइब्रिड फंड्स निवेशकों की पसंद बने और इनमें 17,356 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ।
गोल्ड ETF चमके
अन्य स्कीम्स, खासकर ETFs, में 39,955 करोड़ रुपये आए। गोल्ड ETFs में निवेश दोगुना से ज्यादा बढ़कर 24,040 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो सोने को हेज के तौर पर बढ़ती मांग दिखाता है।
Tata Asset Management के चीफ बिजनेस ऑफिसर आनंद वर्धराजन के मुताबिक फ्लेक्सीकैप फंड्स में निवेश मजबूत बना हुआ है। गोल्ड ETF में जनवरी में रिकॉर्ड करीब 24,000 करोड़ रुपये आए। डेट में भी दिसंबर की निकासी के बाद स्थिरता दिखी है।
कुल मिलाकर, जनवरी में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM बढ़कर 81.01 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो दिसंबर में 80.23 लाख करोड़ रुपये था।






