
सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट बानाने वाली कंपनी, एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (Elitecon International Ltd) ने बीते शनिवार 7 मार्च को अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में Q3FY26 रिजल्ट के बारे में जानकारी दी।
दिसंबर तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 502.72 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3FY25) के 48.40 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 939% ज्यादा है। वहीं कुल आय (Total Income) भी बढ़कर 503.12 करोड़ रुपये हो गई, जो सालाना आधार पर लगभग 927% की बढ़त दर्शाती है।
हालांकि, नेट प्रॉफिट में सीमित बढ़त देखने को मिली और यह 9.53 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 6.62 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 44% ज्यादा है। दूसरी ओर बेसिक ईपीएस (EPS) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 5.47 रुपये से घटकर 0.06 रुपये रह गया, यानी करीब 98.9% की कमी आई।
31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों की अवधि में कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 1206.84 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 177.09 करोड़ रुपये था। वहीं इस अवधि में कंपनी का नेट प्रॉफिट 50.12 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 19.99 करोड़ रुपये था। इससे पता चलता है कि सालाना आधार पर कंपनी की आय और मुनाफे दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है।
Elitecon International Share Price
कंपनी का शेयर बीएसई पर शुक्रवार को 4.97% या 2.74 रुपये गिरकर 52.36 रुपये पर बंद हुआ था।
हाल ही में कंपनी ने दी थी ये जानकारी
हाल ही में कंपनी ने बताया था कि उसके बोर्ड ने एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दयानंद राय का 27 फरवरी 2026 से प्रभावी इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके अलावा कंपनी ने यह भी बताया कि बैठक में सनब्रिज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड (SAPL) के प्रस्तावित अधिग्रहण को वापस लेने (रिवर्सल) पर भी अपडेट दिया था।
फाइलिंग में कंपनी ने बताया था कि 4 सितंबर 2025 को सनब्रिज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड (SAPL) में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने के लिए शेयर खरीद समझौता (SPA) किया था। इसके तहत 31.25% हिस्सेदारी खरीदने के लिए कंपनी ने अपनी आंतरिक संसाधनों से भुगतान किया और ये शेयर कंपनी के नाम ट्रांसफर भी हो गए। बाकी भुगतान प्रस्तावित QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) से मिलने वाली राशि से किया जाना था, लेकिन QIP सफल नहीं हो सका, इसलिए पैसा नहीं मिल पाया।
वहीं 44.99% गिरवी रखे गए शेयर SBICAP सिक्योरिटीज के पास पहले से ही प्लेज थे और उन्हें रिलीज करना जरूरी शर्त थी, जो पूरी नहीं हो सकी। इस कारण यह हिस्सा कंपनी को ट्रांसफर नहीं हो पाया और सौदे का वह भाग आगे नहीं बढ़ सका। कंपनी ने SAPL में संचालन जरूरतों के लिए पहले ही काफी धन निवेश किया है, लेकिन QIP से फंड न मिलने के कारण पूरा अधिग्रहण अटक गया।





