
भारत के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब घर खरीदने की होड़ सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर (जैसे इंदौर, जयपुर, कोच्चि) हाउसिंग मार्केट के नए ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरे हैं। इस बदलाव की कमान ‘मिलेनियल्स’ और ‘जेन-जी’ (Gen Z) संभाल रहे हैं जो अब देश में घर खरीदने के फैसलों में सबसे आगे हैं।
युवाओं के हाथों में हाउसिंग मार्केट की कमान
बेसिक होम लोन (BASIC Home Loan) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 90-95% घरों की खरीदारी अब युवा पीढ़ी कर रही है। ये युवा खरीदार केवल बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों में भी घर तलाश रहे हैं। इसकी बड़ी वजह इन शहरों में बेहतर बुनियादी ढांचा, कम कीमतें और जीवन की बेहतर क्वालिटी है। नेशनल हाउसिंग बैंक के पूर्व सीएमडी राज विकास वर्मा का कहना है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में हाउसिंग फाइनेंस का मजबूत होना सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सम्मान के लिए बेहद जरूरी है।
डिजिटल लोन का बढ़ा क्रेज
आज का युवा कागजी कार्रवाई के बजाय मोबाइल पर लोन लेना पसंद कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 40 साल से कम उम्र के लगभग 72% लोग ऑनलाइन होम लोन के लिए आवेदन करना पसंद करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है; छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकों की तुलना करना और दस्तावेज जमा करना पसंद कर रहे हैं।
डिजिलॉकर (DigiLocker) जैसे डिजिटल टूल्स ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है, जिसका इस्तेमाल करने वाले 80% लोग 35 साल से कम उम्र के हैं।
बैंकों और एनबीएफसी (NBFC) की भूमिका
सस्ती ब्याज दरों और भरोसे की वजह से सरकारी बैंक अब भी पहली पसंद बने हुए हैं, लेकिन निजी बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।
बेसिक होम लोन के सीईओ अतुल मोंगा के मुताबिक, मिलेनियल्स और जेन-जी को तेज और ट्रांसपेरेंट प्रोसेस चाहिए। कई खरीदार तो थोड़ा ज्यादा ब्याज देने को भी तैयार हैं, बशर्ते उन्हें लोन जल्दी मिले और प्रक्रिया आसान हो। छोटे शहरों में एनबीएफसी उन लोगों की मदद कर रहे हैं जिन्हें पारंपरिक बैंक आसानी से लोन नहीं देते।






