कमाई ₹2 लाख लेकिन EMI ₹3.3 लाख! कर्ज के जाल में फंसे सैलरीड लोग, जानें बचने का सही तरीका

AhmadJunaidBlogApril 3, 2026358 Views


Debt Trap: भारत में सैलरी पाने वाले लोगों के बीच कर्ज का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। बिजेनस टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक सेबी से जुड़े निवेश सलाहकार अभिषेक कुमार ने एक ऐसा मामला शेयर किया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।

कुमार ने बताया कि उनके पास एक व्यक्ति ऐसा आया जिसकी महीने की कमाई तो 2 लाख रुपये है, लेकिन उसकी किश्त (EMI) 3.3 लाख रुपये जा रही है। यानी वह हर महीने अपनी कमाई से 1.3 लाख रुपये ज्यादा सिर्फ कर्ज चुकाने में खर्च कर रहा है।

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दिखावे की दुनिया और ‘फिनटेक’ का जाल

अभिषेक कुमार के मुताबिक, पिछले 15 सालों में उन्होंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां लोग बाहर से तो अमीर दिखते हैं, लेकिन अंदर से कर्ज के बोझ तले दबे होते हैं।

उन्होंने इस स्थिति को ‘फाइनेंशियल आईसीयू’ करार दिया है। अक्सर लोग अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए डिजिटल लेंडिंग ऐप्स से छोटे-छोटे कई लोन ले लेते हैं। ये ऐप्स तुरंत पैसा तो दे देते हैं, लेकिन इनकी ब्याज दरें और शर्तें लोगों को कर्ज के ऐसे चक्रव्यूह में फंसा देती हैं जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।

कर्ज से मुक्ति का ‘बैटल प्लान’

इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए अभिषेक कुमार ने एक पांच चरणों वाली रणनीति सुझाई है। उनका कहना है कि सबसे पहले छोटे कर्ज खत्म करने चाहिए। उन्होंने इन्हें ‘मच्छर लोन’ कहा है, जो संख्या में ज्यादा होते हैं और मानसिक तनाव बढ़ाते हैं।

अगर छोटे-छोटे 6-7 लोन बंद कर दिए जाएं, तो महीने की ईएमआई का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है। दूसरे फेज में फिनटेक ऐप्स वाले महंगे कर्ज चुकाने चाहिए, क्योंकि ये आपको बार-बार उधार लेने के लिए उकसाते हैं।

बैंक लोन और व्यवहार में बदलाव

कुमार सलाह देते हैं कि जब भी आपके पास एक साथ बड़ी रकम (जैसे बोनस या फंड) आए, तो उसे कई जगह बांटने के बजाय किसी एक बड़े बैंक लोन को पूरी तरह बंद करने में इस्तेमाल करें।

इससे आपका क्रेडिट स्कोर सुधरेगा और भविष्य में बैंक से कम ब्याज पर लोन मिलने का रास्ता खुलेगा। साथ ही, कर्ज बंद करने के बाद बैंक से ‘एनओसी’ (NOC) लेना और क्रेडिट लाइन को पूरी तरह बंद करना जरूरी है, ताकि दोबारा कर्ज लेने का लालच न आए।

आदत सुधारने की जरूरत

अंत में निवेश सलाहकार का कहना है कि कर्ज की समस्या सिर्फ गणित का हिसाब नहीं है, बल्कि यह इंसान के व्यवहार और आदतों से जुड़ी है।

आजकल ‘बाय नाउ पे लेटर’ (अभी खरीदें, बाद में चुकाएं) जैसी सुविधाओं ने लोगों की खर्च करने की आदतें बिगाड़ दी हैं। लोग बिना सोचे-समझे कई छोटे लोन जमा कर लेते हैं, जिसका असर लंबे समय में उनकी आर्थिक सेहत पर पड़ता है।

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